सहारनपुर। पर्यूषण पर्व के छठें दिन जैन बाग स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में श्रीजी का मंगल अभिषेक और शांतिधारा की गई। इस दौरान जैन मुनि ने कहा कि प्रथम चार दिवसों की पूजा-अर्चना के बाद जीव की आत्मा में उत्तम एवं संयम की भावना बलवती हो जाती है। उत्तम संयम धर्म जीव के लिए कल्याणकारी है।
आचार्य ज्ञेय सागर महाराज ने बताया कि संयम धर्म से आशय सम्यक रूप से पंच इंद्रियों के विषयों पर नियंत्रण रखना और जीवों की रक्षा करना है। पंचेन्द्रिय-विषय जीव को आकर्षित करते है मनमोहक लगते हैं, परंतु इनका फल अत्यंत दुखदाई होता है। जीव अनंतकाल तक नरकों के घोर दुखों को सहन करता है। जैन समाज अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि हमें विचार करना चाहिए कि क्या हमारी क्रियाएं, हमारे भाव संयमित हैं। जबलपुर से आए प्रदीप पीयूष भैयाजी ने भी उत्तम संयम धर्म को विस्तार से समझाया। अनिल जैन, चौधरी डॉ. एके जैन, अनुज जैन, संदीप जैन, अनिल जैन, अरुण जैन, आयुष जैन, राजा विनय जैन, अविनाश जैन, श्रवण जैन, राजीव जैन, विपिन जैन, मुकेश, राजीव, वैभव, अजय, इसांत जैन, प्रवीण जैन, दिनेश, मनीष, अभिषेक, नितिन जैन, अजय जैन, विपिन जैन, बालेश जैन, अजय कमलेश, सरिता, गीता, मनीषा आदि मौजूद रहे।
बालिकाओं ने नाटक की प्रस्तुति दी
सहारनपुर। वीर नगर स्थित जैन बाग मंदिर में महापर्व के तहत उत्तम सोच की संध्या पर विद्योधय संस्कार जैन पाठशाला के विभिन्न बालक व बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। भगवान महावीर स्वामी के भव्य चालीसा का सुंदर चित्रों व आध्यात्मिक संस्कारों के द्वारा बालक व बालिकाओं ने अद्भुत प्रदर्शन किया। आचार्य श्री के आगमन पर स्वागत दृश्य, टीले वाले बाबा की भव्य प्रस्तुति, साथ ही सभी ने सुंदर सुंदर भजनों व नाटिकाओं से प्रस्तुति दी।