चार जनवरी से शुरू हो रहे शहर के स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। आलम यह है कि कई जगहों पर भारी दुर्गंध की वजह से लोगों को सांस रोक कर गुजरना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी हैं।
इस बार देश भर में किए जा रहे स्वच्छता सर्वेक्षण में एक हजार शहरों को शामिल किया गया है। इनमें सहारनपुर भी एक है। पिछले वर्ष 400 शहरों का स्वच्छता सर्वेक्षण कराया गया था। इनमें सहारनपुर का 245वां स्थान रहा था। यानी सहारनपुर में भारी गंदगी पाई गई थी। इसके बावजूद नगर निगम ने स्वच्छता को लेकर कोई खास कदम नहीं उठाया है।
जनवरी में शुरू होने जा रहे स्वच्छता सर्वे को लेकर की जा रही तैयारी नाकाफी नजर आ रही है। आलम यह है कि शहर भर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। इसके अलावा तमाम नाले और नालियों में शील्ट भरी है।
अनेक जगहों पर नालियां ध्वस्त पड़ी हैं। इनकी वजह से पानी सड़कों पर फैल रहा है। यह हालात तब हैं जबकि नगर निगम के पास एक हजार से अधिक सफाई कर्मचारी और अधिकारी हैं। साथ ही संसाधनों की भी कमी नहीं है। हाल ही में घर-घर से कचरा इकट्ठा करने के लिए नगर निगम को 20 छोटी गाड़ी, एक जेसीबी और दो बड़ी मशीनें मिली हैं, जो कचरे से खाद बनाएंगी।
कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं
सहारनपुर को नगर निगम का दर्जा मिले आठ साल बीत चुके हैं। मगर नगर निगम आज तक डंपिंग ग्राउंड नहीं तलाश सका है। कचरा निस्तारण के लिए जगह का चयन नहीं कर सका है।
इसकी वजह से कचरा शहरवासियों और नगर निगम के लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। नगर निगम शहर से कचरा उठाकर शहर के बाहर सड़कों के किनारे डाल रहा है। इसकी वजह से उक्त स्थानों पर कचरा फैल रहा है। प्रशासन ने हाल ही में बेहट रोड पर डंपिंग ग्राउंड की तलाश की है। इसमें भी झोल नजर आ रहा है।
पॉलीथिन भी बन रही समस्या
पॉलीथिन का एक मानक निर्धारित है। मगर शहर में मानकों का उल्लंघन कर पॉलीथिन बनाई और बेची जा रही हैं। इस्तेमाल के बाद पॉलीथिन कचरे में जाती हैं। जहां कचरे का समय से उठान न होने की वजह से गायें और अन्य गोवंश पॉलीथिन को चारा बना रहे हैं जो उनको नुकसान पहुंचा रहा है। नगर निगम पॉलीथिन पर बैन लागू कराने की चेतावनी कई बार दे चुका है। मगर जमीनी स्तर पर अभी तक काम नहीं हुआ है।
लोगों को भी रखना होगा सफाई का ध्यान
गंदगी के लिए लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। सफाईकर्मी सुबह-सुबह बाजारों में सफाई करते हैं, जिसके बाद दुकानें ख्ुुलती हैं, दुकानों की सफाई कर दुकानों के सामने ही सड़कों गंदगी डाल देते हैं।
नेहरू मार्केट समेत तमाम बाजार इसका उदाहरण हैं। हैरत की बात यह है कि 90 फीसदी दुकानों में डस्टविन यानी कूड़ेदान नहीं मिलेंगे। नगर निगम दुकानदारों को रात को दुकान बंद करने से पहले दुकानों की सफाई कर कचरा बाहर रखने की सलाह दे चुका है, मगर कोई असर व्यापारियों पर नहीं हुआ है।
इतना ही नही, नगर निगम ने कुछ समय पहले शहर में गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई करने की बात कही थी, मगर वह भी नहीं हो पाया है। नतीजा लोग लगातार शहर को गंदा कर रहे हैं।
32 गांवों में नहीं रखे गए कूड़ेदान
शहर से सटे 32 गांवों को मिलाकर अक्तूबर 2009 में नगर निगम की स्थापना हुई थी। हैरत की बात यह है कि इन गांवों में आज तक नगर निगम के विकास का पहिया नहीं पहुंचा है। आलम यह है कि 32 गांवों में आज भी लोग घरों का कचरा सड़कों किनारे डाल रहे हैं, जिसकी वजह से गांवों सड़कों किनारे कचरे के ढेर यानी कुरड़ी लगी हैं। नगर निगम इन गांवों में अभी तक कूड़ेदान नहीं रखवा सका है। अनेक जगहों पर नालियों तक पक्की नहीं हो सकी हैं।
मोदी ने दिए शहर को साफ करने के निर्देश
महापौर संजीव वालिया ने महापौर बनने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को शहर की समस्याओं का चिट्ठा सौंपा था। तमाम समस्याओं से हटकर प्रधानमंत्री ने सहारनपुर को साफ-सुथरा बनाने के निर्देश महापौर संजीव वालिया केे दिए थे। प्रधानमंत्री के निर्देशों का असर भी शहर में नजर नहीं आ रहा है।
चार जनवरी से होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर हम पूरी तरह तैयार हैं। अब शहर में समय से कचरे का उठान हो रहा है। यदि कहीं पर अव्यवस्था है तो उसे भी तुरंत दूर कराया जाएगा। नगर वासियों के सहयोग के बिना सहारनपुर को स्वच्छ बना पाना संभव नहीं है।
- गौरव वर्मा, नगरायुक्त।