वर्षों से नहीं बदले बाबुओं के पटल, अधिकारियों की मंशा पर सवाल
सहारनपुर। नगर निगम में कुछ चहेते कर्मचारियों के पटल वर्षों से नहीं बदले गए हैं, जबकि नियम किसी भी कर्मचारी के तीन वर्ष से अधिक समय तक एक पटल पर नहीं रहने चाहिए। बीते दिनों नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने इस मामले में कर्मचारियों के नाम तक लेकर हंगामा कर पटल बदलने की मांग की थी। अब अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
तीन नवंबर को जनमंच में हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में पार्षद अभिषेक अरोड़ा उर्फ टिंकू ने पटल नहीं बदलने को लेकर हंगामा किया था। उन्होंने बाबुओं के नाम तक गिनाए थे। तब महापौर और नगरायुक्त ने जल्द पटल बदलने का आश्वासन दिया था। लेकिन पटल अब तक नहीं बदले गए हैं। ऐसे में अन्य पार्षद भी अब सामने आने लगे हैं। वार्ड 51 के पार्षद चौधरी शहजाद ने भी 15 दिसंबर को नगरायुक्त को ज्ञापन देकर पटल बदलने की मांग की है। निगम सूत्रों ने बताया कि जिन लिपिकों के पटल नहीं बदले गए हैं उनमें से लेखा विभाग, निर्माण विभाग और एक अन्य विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। दो कर्मचारी ऐसे हैं, जिनका पटल दस वर्ष से अधिक समय से नहीं बदला गया है, जबकि एक कर्मचारी करीब 20 साल से एक ही कुर्सी पर जमा है। एक कर्मचारी करीब पांच साल से एक कुर्सी पर काबिज है। पार्षदों का भी आरोप है कि बीते करीब दस साल में कर्मचारियों के पटल बदले, मगर इन कर्मचारियों को छेड़ा तक नहीं गया।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को कई अहम जिम्मेदारी
नगर निगम ने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अहम जिम्मेदारियां देने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। उक्त व्यक्ति की तैनाती मुंशी के पद पर हुई थी। मगर नगर निगम ने उसे करीब पांच साल से कई अहम विभाग दिए हुए हैं। उन्हीं का नाम लेकर बोर्ड बैठक में हंगामा हुआ था।
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बोर्ड बैठक में पटल बदलने का मामला उठाया गया था। व्यक्तिगत रूप से महापौर और नगरायुक्त से मिलकर पटल बदलने की मांग की जा चुकी है, मगर अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
अभिषेक अरोड़ा उर्फ टिंकू, पार्षद।
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कुछ लिपिकों के पटल बदलने की मांग उठती रही है। इस संबंध में नगरायुक्त को कहा गया था। पार्षद फिर से मांग कर रहे हैं। नगरायुक्त को पुन: पत्र लिखकर लिपिकों के पटल बदलने को कहा जाएगा।
संजीव वालिया, महापौर।