जनपद में मधुमक्खियां फरवरी से अप्रैल महीने तक यूकेलिप्टस, लीची, आम और सरसों आदि से शहद प्राप्त करती हैं। मई से लेकर जून तक मौनपालक मधुमक्खियों के डिब्बों को अलीगढ़ एवं मथुरा से लेकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड आदि राज्यों में ले जाते हैं। जहां पर लाही, सूरजमुखी, नीम आदि से मधुमक्खियां शहद प्राप्त करती हैं।
वर्ष 1990 से मधुमक्खी पालन कर रहे अजय सैनी ने गंगोह में शहद प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किया है। इसकी क्षमता 30 टन शहद को प्रतिदिन प्रसंकृत करने की है।
शहद के साथ ही मोम (बी वैक्स) का भी आस्ट्रेलिया निर्यात किया जाएगा। वहां 69 हजार किलो शहद और 20 हजार किलो मोम भेजा जाएगा। इसके लिए शहद का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह ऑर्डर मार्च तक आस्ट्रेलिया भेज दिया जाएगा। इससे पहले शहद को अमेरिका निर्यात किया गया था। शहद के निर्यात होने से जनपद के मौन पालकों को भी काफी लाभ होगा। - अजय सैनी, मधुमक्खी पालक एवं निर्यातक