गंगोह कोतवाली क्षेत्र के गांव कल्लरहेड़ी में हुए चर्चित अरबीन चौहान हत्याकांड ने बुधवार को उग्र रूप ले लिया। पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने कोतवाली का घेराव कर प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी।
इसके बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही कैराना सांसद इकरा हसन और विधायक नाहिद हसन सहित कई दिग्गज नेता मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों द्वारा 3 दिन में निष्पक्ष कार्रवाई और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिए जाने के बाद ही मामला शांत हो सका।
बता दें कि शनिवार की देर रात कल्लरहेड़ी गांव में स्थित एक टायर फैक्ट्री से धुआं निकलने की बात को लेकर विवाद हो गया था। देखते ही देखते दूसरे पक्ष के दर्जनों लोगों ने हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में अरबीन चौहान की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने 15 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिनमें से 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि एक आरोपी पुलिस हिरासत में उपचाराधीन है।
पुलिस कार्रवाई और वादी बदलने को लेकर बढ़ा गुस्सा
बुधवार को मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने परिजनों की जगह चौकीदार को मामले का वादी बना दिया। इसके अलावा, हत्या में इस्तेमाल किए गए मुख्य हथियारों को छिपाकर केवल लाठी-डंडे और पॉपुलर के डंडे दिखाए गए हैं। इसी से नाराज होकर परिजनों संग भारी संख्या में ग्रामीण कोतवाली परिसर में धरने पर बैठ गए और निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे।
प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने के लिए कोतवाली पुलिस ने जबरन बल प्रयोग किया और लाठियां भांजना शुरू कर दिया। पुलिस के लाठीचार्ज करते ही इससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश और अधिक गहरा गया।
दिग्गज नेताओं का लगा जमावड़ा
लाठीचार्ज की खबर आग की तरह क्षेत्र में फैल गई, जिसके बाद भारी संख्या में लोग कोतवाली पहुंचने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कैराना सांसद इकरा हसन, विधायक नाहिद हसन, पूर्व नगर पालिका चेयरमैन नोमान मसूद, हमजा मसूद, सपा नेता धर्मवीर खटाना और भीम आर्मी के महताब अली अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
तीन दिन के आश्वासन पर माना पक्ष
नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों से वार्ता की। अधिकारियों द्वारा परिजनों की मांगों पर ध्यान देने और 3 दिन के भीतर सभी शेष आरोपियों की गिरफ्तारी व जांच में सुधार का ठोस आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद ही परिजन और ग्रामीण शांत हुए और धरना समाप्त किया।