सहारनपुर। नगर निगम ने नागरिकों काे सर्दी से बचाने के लिए एक ऐसी तरकीब निकाली है, जिसमें अलाव के लिए दी जा रही लकड़ियां भी खर्च नहीं हो रही हैं और लोग पसीने-पसीने भी हो रहे हैं। इस बार कुछ ऐसा ही मजाक किया गया है। नगर निगम द्वारा सूखी लकड़ियों के भाव 18.33 लाख रुपये में खरीदी गई लकड़ियों में ज्यादातर गीली जड़ें हैं, जिनमें पानी भरा है। पेट्रोल, टायर का टुकड़ा और अन्य उपाय भी इन लकड़ियों को जलाने में फेल साबित हो रहे हैं।
अलाव और कंबल वितरण के लिए नगर निगम ने इस बार 65 लाख रुपये का बजट रखा है। अलाव के लिए 250 स्थल निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक स्थल पर प्रतिदिन कितनी लकड़ी डालनी है यह निर्धारित नहीं है। कहीं कम लकड़ी डाली जा रही है और कहीं ज्यादा। खास बात यह है कि ज्यादातर लकड़ियां गीली जड़ें हैं। जैन कॉलेज रोड पर बीते दिनों, जितनी भी लकड़ी डाली गई हैं उनमें 80 फीसदी पतली जड़ें थीं, जिनको तोड़ने का प्रयास किया जाए तो अंदर से पानी निकलता है। निगम के कर्मचारी टायर का टुकड़ा या इंजन का बुझा हुआ मोबिल ऑयल डालकर जलाकर चले जाते हैं, लेकिन पांच मिनट बाद ही अलाव बुझ जाता है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जैसी लकड़ी दी जा रही हैं वह वही डाल रहे हैं। शहर में अन्य जगहों से भी गीली लकड़ी डालने की शिकायत मिल चुकी है। बता दें, कि इस बार नगर निगम ने तीन हजार क्विंटल यानी 300 टन लकड़ी खरीदी हैं। लकड़ी 611 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई हैं, जो 18.33 लाख रुपये की बैठती हैं। यानी सूखी लकड़ी के भाव पर गीली लकड़ियां खरीदी गई हैं, जिनका रेट सूखी से कम होता है।
दोगुना हुआ बजट, व्यवस्था वही चौपट
बीते वर्ष नगर निगम ने अलाव और कंबल आदि की खरीद पर 50 लाख रुपये खर्च किए थे। इनमें 24 लाख रुपये की देनदारी वर्ष 2023-24 की लकड़ियों की शामिल थी। यानी 2024-25 में 36 लाख रुपये खर्च हुए थे। इस बार वर्ष 2025-26 में अलाव और कंबल के लिए 65 लाख का बजट रखा गया है और व्यवस्था सबके सामने है। शहर में शामिल 32 गांव अलाव की सूची से बाहर हैं, जबकि वहां गरीब जनता बसती है।
गीली लकड़ियां डालने की शिकायत का संज्ञान लिया गया है। जहां पर लकड़ियां स्टोर की गई हैं वहां का निरीक्षण किया गया। संबंधित अधिकारी से लिखित में जवाब देने को कहा गया है।
- जेपी यादव, प्रभारी, अलाव/सहायक नगर आयुक्त