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Saharanpur News: कृषि विज्ञान केंद्र कर रहा अरहर की दो प्रजातियों का ट्रायल

Sat, 30 Nov 2024 12:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र अरहर की दो प्रजातियों का ट्रायल कर रहा है। इनमें राजेंद्र अरहर-1 और पदमश्री चंद्रशेखर द्वारा विकसित अरहर की प्रजाति शामिल हैं। ट्रायल सफल रहा तो अरहर की इन प्रजातियों की बुवाई किसानों के यहां कराई जाएगी।
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जनपद में दलहनी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने की कवायद चल रही है। जनपद में फिलहाल 4146 हेक्टेयर में दलहनी फसलों की खेती हो रही है। इसमें खरीफ सीजन में दलहनी फसलों का रकबा 1200 से 1350 हेक्टेयर और रबी सीजन में करीब 2801 हेक्टेयर रहता है। दलहनी फसलों में मसूर का रकबा सबसे अधिक और चना का क्षेत्रफल सबसे कम है। एक समय खासे क्षेत्रफल में होने वाली अरहर की फसल अब नाममात्र हो रही है। जनपद में 20 से 25 वर्ष पूर्व लोग अरहर की खेती बड़े स्तर पर करते थे। इसमें फफूंदी जनित विल्ट रोग और फलीबेधक कीट का प्रकोप बढ़ने से इसका उत्पादन प्रभावित हुआ। जिससे किसानों ने इसकी खेती को लगभग बंद कर दिया।



जनपद में अरहर की खेती को बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र पर अरहर का प्रदर्शन तकनीकी पार्क में लगाया गया है। इसमें राजेंद्र अरहर-1 की उत्पादन क्षमता 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसकी बुवाई 15 जून से 15 जुलाई तक कर लेनी चाहिए, इसमें प्रति हेक्टेयर में बीज की मात्रा 10 किलोग्राम की पर्याप्त रहती है। दूसरी प्रजाति का उत्पादन भी बढि़या है। ट्रायल से यह पता चल सकेगा कि जनपद में कौन सी प्रजाति अधिक सफल रहेगी।
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- वर्जन -



जनपद में 20 से 25 वर्ष पूर्व लोग अरहर की खेती होती थी। इसमें विल्ट और फलीबेधक प्रकोप बढने से इसका उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे किसानों ने अरहर की खेती को लगभग बंद कर दिया। ट्रायल सफल रहने पर जनपद में इसका रकबा बढ़ाया जाएगा। - डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
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- जनपद में दाल का रकबा हेक्टेयर में

फसल - क्षेत्रफल
उड़द 1345
मटर 20

चना 13

मसूर 2768
याेग - 4146


नोट: कृषि विभाग के अनुसार
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