यमुना नदी से किशोर को बाहर निकाल कर लाते ग्रामीण
नकुड़। सगे भाइयों और किशोर की मौत के बाद उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है। गंगा दशहरे का स्नान उनके लाडलों के लिए आखिरी साबित हुआ। अनमोल जहां अपने पिता का इकलौता पुत्र था। वहीं, सागर और विक्की की मौत के बाद मांगेराम की वंशबेल ही समाप्त हो गई। लाडलों की मौत के बाद दोनों ही परिवारों के घर-आंगन सूने हो गए।
गांव अघ्याना में जिसने भी हादसे के बारे में सुना वह मांगेराम के घर की तरफ दौड़ पड़ा। घर से रह रह कर करुण रुदन की आवाजें आ रही थी। हर किसी की आंख में आंसू थे। राज मिस्त्री का काम करने वाले मांगेराम की दोनों संतानें हादसे में अकाल मौत का शिकार हो गई। बेटों की मौत के बाद उसका घर-आंगन सूना हो गया। वह सूनी आंखों से घर पर जुट रही भीड़ को देख रहा था। बीच बीच में बेटाें को याद कर बिलख पड़ता था। सागर और विक्की मौत के बाद उनकी मां बार-बार बेसुध हुई जा रही थी। विक्की गंगोह के एक काॅलेज से पॉलिटेक्निक कर रहा था, जबकि सागर और अनमोल नकुड़ के एक काॅलेज में कक्षा 11 में पढ़ रहे थे।
अनमोल भी अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। अनमोल की बड़ी बहन अक्षिता कक्षा 12 में पढ़ती है। बहन और मां ने जब अनमोल की मौत की खबर सुनी तो वे पछाड़ खाकर गिर पड़ी। पेशे से किसान पिता नवीन का रो-रो कर बुरा हाल था। वे उस घड़ी को कोस रहे थे, जब बेटा घर से नहाने के लिए निकला था। दोनों परिवारों के घर सांत्वना देने पहुंचने वाले ग्रामीणों की भीड़ लगी थी।
यमुना नदी से किशोर को बाहर निकाल कर लाते ग्रामीण