आजादी के 68 साल बाद तक बिजली से वंचित ढिक्का टपरी गांव जगमगा उठा। बृहस्पतिवार को गांव में बिजली आनी शुरू हो गई। बृहस्पतिवार को एक समारोह में संघर्ष समिति के लोगों ने विद्युत अधिकारियों के साथ ही अमर उजाला का भी धन्यवाद किया।
समिति के लोगों ने कहा कि यदि अमर उजाला उनका साथ नहीं देता तो उन्हें बिजली नहीं मिल पाती। इस मौके पर हरियाणा के रादौर क्षेत्र से विधायक श्याम सिंह राणा ने भी अमर उजाला के प्रयासों की प्रशंसा की।
सहारनपुर जनपद के सरसावा ब्लॉक का गांव ढिक्का टपरी गांव यमुना नदी के पार हरियाणा की सीमा पर स्थित है। करीब 2500 जनसंख्या वाले इस गांव के लिए बृहस्पतिवार का दिन ऐतिहासिक रहा। आजादी के 68 साल बाद इस गांव में बिजली पहुंची।
बृहस्पतिवार को जैसे ही गांव में बल्ब जले ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना न रहा और वे खुशी से ढोल की धुन पर नाचने लगे। इसके बाद गांव के प्राथमिक विद्यालय में समारोह हुआ। जिसमें संघर्ष समिति ने गांव में विद्युतीकरण के लिए यूपी और हरियाणा विद्युत निगम के अधिकारियों का सम्मान किया।
इस मौके पर समिति ने हरियाणा के रादौर से विधायक श्याम सिंह राणा और सहारनपुर की अमर उजाला टीम के प्रयासों की जमकर सराहना की गई। हैरानी की बात ये है कि अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अनेक समस्याओं का दंश झेल रहे इस गांव में बिजली भी नही पहुंच पायी थी।
जिसके कारण ग्रामीण परेशान थे। अपने भविष्य के प्रति सजग युवा वर्ग ने गांव की तस्वीर बदलने की ठानी और गांव में बिजली लाने के लिए संघर्ष समिति का गठन किया। जिसमें उसे अमर उजाला का भी साथ मिला। अमर उजाला ने संघर्ष समिति के आंदोलनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
जिसके बाद गांव के प्रति उदासीन रवैया अपनाए विद्युत निगम के अफसरों की कुंभकर्णी नींद टूटी और गांव में विद्युतीकरण के प्रयास शुरू हो गए। इसमें समस्या यह थी कि यमुनापार कर बिजली कैसे दी जाए। जिसका हल भी समिति ने निकाला। समिति ने उप्र के विद्युत निगम को सुझाया कि कनेक्शन यूपी दे और बिजली हरियाणा राज्य से मिले। जिसे विद्युत निगम ने मान लिया।
उप्र विद्युत निगम के एसडीओ अर्जुन सिंह और अवर अभियंता राजकुमार ने बताया कि गांव में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बिजली का सामान लगाया गया। अब तक गांव में पांच सौ विद्युत कनेक्शन लिए गए हैं। विद्युत आपूर्ति के लिए हरियाणा से छह सौ किलोवाट बिजली मिलेगी।
इस मौके पर संघर्ष समिति के रणधीर, प्रदीप, बाबूराम, धीरज, सन्नी, मोनू, विजय, टीनू, हरदीप, विक्रांत, विक्रम, नरेश, मेघ सिंह, सेवाराम, पवन, केशव, रमेश आदि के अलावा समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।
नहीं बुलाए जनप्रतिनिधि
सरसावा। ढिक्का टपरी के ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली से इतने खफा थे कि गांव में 70 साल बाद हो रहे विद्युतीकरण के मौके पर हो रहे समारोह में ग्राम प्रधान तक को सूचना नहीं दी। संघर्ष समिति के प्रदीप, रणधीर, धर्मेंद्र, विजय आदि ने साफ कहा कि पूर्व प्रधान हर्षवर्धन तथा तथा वर्तमान प्रधान सूफिया के पति रिफाकत ने विद्युतीकरण के काम में कोई दिलचस्पी नहीं ली, जिसके बाद संघर्ष समिति ने तय किया कि जन प्रतिनिधियों के बगैर ही कार्य को अंजाम दिया जाएगा। जबकि पूर्व प्रधान हर्षवर्धन तथा वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि रिफाकत ने कहा कि उन्होने ढिक्का टपरी में विद्युतीकरण के लिए अधिकतम प्रयास किए हैं।