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ब्रांडेड कंपनियों के छदम विज्ञापन दिखाने पर प्रशासन तल्ख

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सहारनपुर। अब छद्म विज्ञापन दिखाकर गुमराह करने और आपत्तिजनक विज्ञापन दिखाने पर प्रशासन सख्ती बरतेगा। जिला प्रशासन की ओर से ऐसे विज्ञापन दिखाने वालों को सख्त हिदायत दी गई है। आदेश का उल्लंघन करने पर उत्तर प्रदेश मादक पान (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम में छह माह तक का कारावास अथवा जुर्माना दोनों से दंडित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने ये आदेश प्रमुख सचिव उत्तरप्रदेश शासन आबकारी विभाग के पत्र के हवाले से दिया है।
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जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि शराब उत्पादकों एवं व्यापारियों की ओर से किसी भी ब्रांड का किसी भी रूप अर्थात प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया जाना, दूरदर्शन अथवा सिनेमा हाल में दिखाया जाना या वितरित किया जाना एवं किसी समाचार पत्र या पत्रिका में प्रकाशित कराना पूर्णत: निषिद्ध है। शराब के विज्ञापन के अंतर्गत कोई मुद्रित, साइक्लोस्टाइल, टंकित किया, हाथ से लिखा हुआ या टैग से तैयार किया हुआ रेखाकंन या चित्रांकन किसी सार्वजनिक स्थान अथवा किसी दीवार, भवन या विज्ञापन पर प्रदर्शित किया जाना निषिद्ध है। किसी भी शराब के व्यवसायी की ओर से किसी भी मादक पान के उपभोग के लिए निवेदन या उसके विक्रय के लिए प्रस्तुत करने वाला कोई विज्ञापन न तो प्रकाशित करेगा और न ही प्रकाशित कराएगा।
ये करती हैं कंपनियां अक्सर चालाकी
मदिरा उत्पादकता पेय आसवनियों की चतुराई पूर्ण विज्ञापन में अपने उत्पादक ब्रांड का काफी बड़े अक्षरों में विज्ञापन देकर नीचे काफी छोटे व अपठनीय अक्षरों में अन्य विविध माध्यमों से छद्म विज्ञापन किया जाता है। इसे शासन और प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। उदाहरण देते हुए बताया कि संगीतमय कार्यक्रमों में ‘‘छाया सुनिधि का जादू’’ के आड में शराब के ब्रांड जैसे सीग्राम इम्पीरियल ब्लू, साथ में ही सूक्ष्म शब्दों में विज्ञापन में सुपर हिट लिख दिया जाता है, जो कि लगभग अपठनीय होता है और म्यूजिकल कैसेट एवं सीडी पर भी उक्त शब्द अंकित किए जाते हैं, जिसे सामान्य आंखों से पढ़ना संभव नहीं हो पाता है।
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ये दी गई प्रशासन की ओर से चेतावनी
चेतावनी दी कि समस्त प्रकार के ऐसे विज्ञापन जो उच्च न्यायालय के आदेशों का छद्म विज्ञापन दिखाकर गुमराह कर रहे हैं उन्हें प्रतिबंधित किया। जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा कि निर्देश के उल्लंघन पर उल्लंघनकर्ता को उत्तर प्रदेश मादक पान (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1976 की धारा - 6 के अंतर्गत 06 माह तक का कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों से दंडित कराने के लिए अभियोजन की कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता को गंभीरता से लिया जाएगा।
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