देवबंद। मिरगपुर गांव यूं तो किसी पहचान का मोहताज नहीं है, लेकिन चुनाव के दिनों में यह गांव सुर्खियों में रहता है। अक्सर देखा जाता है कि चुनाव में कहीं शराब का दौर चलता है तो अन्य लुभावने लालच दिए जाते हैं, लेकिन मिरगपुर एक ऐसा गांव है जो पूरी तरह नशामुक्त है। यहां पर दावत के नाम पर हलवा-पूड़ी और मिठाई मिलती है।
गुर्जर बाहुल्य मिरगपुर की आबादी करीब 10 हजार है। इसमें करीब 4800 मतदाता हैं। इस ग्राम पंचायत से एक गैर आबाद मजरा भिक्कूपुर भी जुड़ा हुआ है। यहां पर चुनाव में विकास का मुद्दा सबसे प्राथमिकता पर रहता है। यही वजह है कि गांव की हर गली पक्की बनी हुई है। ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा प्रधानी चौधरी जोध सिंह के परिवार में ही घूमती रही है, क्योंकि इस परिवार से सर्वाधिक तीन बार प्रधान चुने गए हैं। ग्रामीण चौधरी कालूराम व चौधरी ओमपाल सिंह बताते हैं कि करीब 25 साल पहले चौधरी जोध सिंह की पत्नी महेंद्री चुनाव जीतकर प्रधान बनीं थीं। इसके बाद चौधरी जोध सिंह को ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रधान चुन लिया था।
जोध सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पुत्रवधू अनिता पत्नी शिवकुमार प्रधान चुनी गईं थी। 2020 में हुए चुनाव में दूसरे पक्ष से चौधरी अर्जुन सिंह की माता संतोष देवी को प्रधान चुना गया। प्रधान प्रतिनिधि अर्जुन सिंह प्रधान संगठन के ब्लाॅक अध्यक्ष भी हैं।