रमजान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा की रमजान में हर इबादत और नेक अमल का सवाब बढ़ा दिया जाता है और बंदा-ए-मोमिन की हर नेकी के बदले में इजाफा हो जाता है।
मौलाना ने कहा कि रमजान माह में तीन हिस्से हैं और हर हिस्से का नाम दिया गया है। पहले हिस्से को जो 10 दिन का है उसे रहमत कहा जाता है, दूसरा हिस्सा जो रमजान की 11 तारीख से 20 तक होता है उसे मगफिरत कहा जाता है और तीसरा हिस्सा जो 21 से शुरू होकर 30 को खत्म होता है उसे जहन्नुम से आजादी का हिस्सा कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई शख्स रोजा नहीं रखता और जान बूझकर ऐसा करता है तो वो खुदा से बगावत का एलान करता है और अल्लाह ऐसे बागियों को सजा देता है। कहा कि जो लोग चाहते हैं कि वे दुनिया और दूसरी दुनिया में आराम की जिंदगी गुजारें वो सिर्फ रमजान ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी अल्लाह के हुक्म की तामील करे।