देवबंद। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम यूं तो दीनी तालीम और फतवों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन शायद ही कम लोग जानते होंगे कि दारुल उलूम से जारी होने वाले फतवों पर शोध भी चल रहा है। अभी तक 12 हजार 378 से अधिक फतवों पर शोध कर उन्हें किताब की शक्ल दी गई है। इनसे 18 पुस्तकें तैयार हो चुकी है, जिन्हें इफ्ता (मुफ्ती का कोर्स) के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
देश-विदेश में रहने वाले मुसलमान शरीयत के हुक्म के मुताबिक अपने कार्य करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें शरीयत की जानकारी नहीं होती। ऐसी स्थिति में वह दारुल उलूम देवबंद का रुख करते हैं। मुफ्तियों से शरीयत की रोशनी में सवालों के जवाब लेते हैं, लेकिन दारुल उलूम का यह सिलसिला केवल फतवे जारी करने तक ही सीमित नहीं रहता। संस्था में तीन सदस्य टीम फतवों पर शोध भी करती है। एक आंकड़े के मुताबिक दारुल उलूम के इफ्ता विभाग से एक वर्ष के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर करीब 15 हजार फतवे जारी होते हैं। यह तादाद कभी बढ़ जाती है तो कभी घट जाती है। सभी फतवों को संकलन विभाग में भेजा जाता है। यहां नियुक्त मुफ्ती मुस्तफा अमीन पालनपुरी, मुफ्ती हिब्बान अलीगढ़ी और अमीरुल्लाह फतवों पर शोध करते हैं। (संवाद)
-
इस तरह होता है काम
मुफ्ती मुस्तफा अमीन ने बताया कि जो फतवे इफ्ता विभाग से जारी हो चुके हैं या हो रहे हैं, उन्हें शोध के लिए भेजा जा रहा है। इसमें हदीस की रोशनी में जो सवालों के जवाब दिए जाते हैं, उन्हें फतवों से अलग कर लिया जाता है। इसके बाद उन जवाबों पर किताब का नाम, पेज नंबर लिखा जाता है और बाद में उसे किताब की शक्ल दी जाती है। अभी हजारों फतवे हैं, जिन पर काम जारी है। इन किताबों को पाठ्यक्रम में इसलिए शामिल किया गया है, जिससे छात्रों को भी उसकी जानकारी मिल सके।