सहारनपुर। दिवाली का पर्व करीब आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ने लगी है। इसी के साथ मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। विडंबना यह है कि त्योहार पर खरीदी गई और खाई मिठाई मिलावटी है या नहीं, इसका पता समय रहते पता नहीं चलता। जांच रिपोर्ट आने में एक से डेढ़ महीने का समय लग जाता है। बीते छह महीने में 585 नमूनों में से 446 फेल हुए थे।
अगले महीने दिवाली का त्योहार है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जांच अभियान शुरू कर दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में दुकानों का निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने जिन खाद्य पदार्थों की नमूने एक से डेढ़ महीने पहले लिए थे, उनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। अब जो नमूने लिए जा रहे हैं, उनकी रिपोर्ट भी एक से डेढ़ महीने बाद आएगी। तब तक त्योहारों में खरीदी या खाई मिठाई मिलावटी है या नहीं, इसका पता नहीं चल पाएगा। खाद्य पदार्थ का नमूना जांच में फेल आने पर गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। इसी वजह से मिलावटखोर त्योहारों में सक्रिय हो जाते हैं।
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जांच रिपोर्ट आने पर कई नमूनों में गुणवत्ता संबंधी खामियां
जांच रिपोर्ट आने पर कई नमूनों में गुणवत्ता संबंधी खामियां और मिलावट पाई गई। इनमें पनीर, छैना रसगुल्ला, दूध आदि खाद्य पदार्थ शामिल हैं। पनीर में पॉमोलीन तेल तक की पुष्टि हो चुकी है।
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कितने समय में खराब हो सकती हैं मिठाइयां
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि मिठाइयां फ्रिज में नहीं रखी गईं तो 24 घंटे में खराब हो सकती हैं। फ्रिज में रखी हुई मिठाइयां एक सप्ताह तक चल सकती हैं। यदि जिस स्थानों पर मिठाइयों को रखा गया है, वहां नमी व गंदगी है तो जल्द मिठाइयां खराब हो सकती हैं।
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छह महीने में 2459 स्थानों का निरीक्षण
सहायक आयुक्त खाद्य प्रथम अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि एक अप्रैल से सितंबर तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली की टीमों ने 2459 स्थानों का निरीक्षण किया। 455 जगहों पर छापा मारा गया। इस दौरान 585 खाद्य पदार्थों के लिए नमूने संग्रहित किए गए। 446 खाद्य पदार्थों के नमूने फेल निकले हैं। इनमें 112 अधोमानक, 99 असुरक्षित, 12 मिथ्याछाप और 223 नमूने मानकों के अनुरूप नहीं मिले हैं।