सहारनपुर। हज में शरीक हजरात की अगर तरतीब बिगड़ जाए तो उस पर एक दम वाजिब हो जाएगा। ऐसा नहीं करने पर हज तो पूरा होगा, मगर वाजिब नहीं होगा। यह फतवा दारुम उलूम देवबंद ने हज में रमी से पहले कुर्बानी करने वाले एक हाजी के सवाल पर दिया है। एक अगस्त को दारुम उलूम की वेबसाइट पर प्रश्न संख्या 41271 में वाजिब हज के बारे में पूछा गया था।
दारुम उलूम देवबंद की ओर से इमाम अबु हनीफा का कहना है कि हज के दौरान तरतीब (तरीका) बेहद जरुरी है। अगर तरतीब बिगड़ जाए तो हाजी पर एक दम (बकरे की कुर्बानी) वाजिब हो जाता है। इसके बाद ही उसका हज पूरा माना जाएगा। दरअसल, हज के दौरान रमी के दौरान सात कंक्कड़ मारे जाते हैं और उसके बाद कुर्बानी दी जाती है। फिर हाजी तवाफ-ऐ जियारह करते हैं। इसमें अल्लाह के घर का शबाब होता है। इसके बाद हाजी हलाक करता है। प्रश्न पूछने वाले वाले ने रमी वाले दिन 11 बजे कुर्बानी की व्यवस्था कर रमी के लिए चला गया। उसने और पत्नी ने 11.45 बजे रमी की और फिर वे अल्लाह के घर का शबाब (तवाफ-ऐ-जियारह) करने लगे। बाद में कुर्बानी के बारे में बता करने पर उन्हें बताया गया कि वह 11 बजे ही कर दी गई थी। ऐसे में उनकी तरतीब बिगड़ गई। उन्होंने दारुम उलूम से पूछा कि क्या उनका हज वाजिब है या नहीं। फतवा (821/804/एन=1433) में कहा गया कि तरतीब में बताया गया है कि रमी के बाद कुर्बानी की जाती है। अगर कुर्बानी पहले कर दी गई तो हज तो बिना किसी शंका के पूरा हो गया है। मगर, अब हाजी को एक दम (एक बकरे की कुर्बानी) देनी होगी। मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के मुफ्ती अरशद फारुखी का कहना है कि बिना तरतीब बिगड़ने पर बिना दम के हज वाजिब नहीं होगा।