सहारनपुर। भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया को गोली मारने के मामले में पकड़ा गया प्रवीण उर्फ मांडा सिपाही बनना चाहता था, मगर वक्त ने उसे हत्या का आरोपी बना दिया। पुलिस हिरासत में आरोपी ने कहा कि तमंचे की छेड़छाड़ के दौरान अचानक गोली चल गई, जिससे यह अनहोनी हो गई।
रामनगर में सचिन वालिया की मौत के मामले में पुलिस ने मंगलवार को उसके परिवार के ही प्रवीण उर्फ मांडा की गिरफ्तारी दर्शा दी। बातचीत में प्रवीण ने बताया कि वह पुलिस विभाग में भर्ती होने की तैयारी के साथ पढ़ाई भी कर रहा था। नौ मई को बारह बजे के करीब उसे कोचिंग के लिए जाना था। इसी बीच ताऊ के लड़के सचिन वालिया का फोन आया तो वह सीधे निहाल के कमरे पर चला गया। वहां पर सचिन वालिया समेत सात युवक मौजूद थे। जहां पर एक तमंचा रखा हुआ था। अन्य साथियों की तरह वह भी तमंचे से छेड़छाड़ करने लगा। नाल में कारतूस फंसा था, जिससे वह देख नहीं पाया। इसी बीच ट्रिगर दब गया और गोली सामने बैठे सचिन वालिया को लग गई, जिससे वह घबरा गए। बाद में प्राइवेट कार मंगाकर उसे अस्पताल ले गए, जहां पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
यह था पूरा सीन
नौ मई को करीब सवा ग्यारह बजे के करीब का टाइम था। सचिन वालिया और प्रवीण उर्फ मांडा समेत आठ लड़के मुहल्ले के ही निहाल के घर में मौजूद थे, जहां पर टेबिल पर तमंचा रखा हुआ था। सचिन वालिया दीवान पर बैठा हुआ था, जबकि अन्य साथी सोफे पर बैठे थे। आरोपी प्रवीण सोफे के एक कोने पर सचिन के ठीक सामने थोड़ा ऊंचा होकर बैठा था। अन्य साथियों की तरह प्रवीण तमंचा हाथ में उठाकर देखने लगा। उसी समय अचानक गोली चल गई, जो सीधे सचिन को जाकर लग गई।