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वर्ष 1995 में वुजूद में आया था कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया

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1995 में हुआ था कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया का गठन
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देवबंद (सहारनपुर)। कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया का गठन वर्ष 1995 में किया गया था। इसका उद्देश्य तालीमी निजाम को बेहतर बनाना, मदरसों की हिफाजत करना और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना है।
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राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के तहत हर तीन वर्ष में मजलिस-ए-अमूमी (आम सभा) और हर वर्ष मजलिस-ए-आमला (वर्किंग कमेटी) का इजलास होता है। जिसमें मदारिस-इस्लामिया के सामने आने वाली परेशानियों पर विचार विमर्श कर उसका हल निकाला जाता है। शिक्षा व संस्कारों को बुलंद करने, दीनी निजाम की हिफाजत को यकीनी बनाने के लिए दो हजार अरबी मदारिस के जिम्मेदारों के प्रस्ताव से दारुल उलूम में इसका मुख्य कार्यालय बनाया गया था। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था व संस्कारों को बेहतर बनाने, एकजुटता और आपसी भाईचारे बढ़ावा देना, संबंधों को बेहतर बनाने, मदरसों की हिफाजत और तरक्की के लिए सही तरीके को इख्तियार करने, जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम में समय समय पर बदलाव किए जाने, मदरसों के खिलाफ की जाने वाली कोशिशों और साजिशों पर नजर रखने, मुस्लिम समाज में सुधार लाने और मजहब की हिफाजत करना आदि शामिल हैं। राब्ता-ए-मदारिस से तीन हजार से ज्यादा मदरसे संबद्ध हैं। हर राज्य में एक इसका एक अध्यक्ष नियुक्त है और इसके लिए 51 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है। जिसमें मजलिस-ए-शूरा के सदस्य, दारुल उलूम के उस्ताद और मुल्क के प्रमुख उलमा शामिल हैं। जबकि एक कमेटी मजलिस अमूनी (आम सभा) है जिसमें शूरा के सदस्यों के अलावा 15 दारुल उलूम के उस्ताद व हर इदारे का एक-एक प्रतिनिधि शामिल किया गया हैं। अब तक राब्ता मदारिस के तत्वावधान में एक दर्जन से अधिक बड़े इजलास किए जा चुके हैं। इसमें खास वर्ष 2008 में देवबंद हुआ आतंकवाद विरोधी सम्मेलन है। जिसमें मुल्क की हर जमात के करीब 20 हजार से अधिक उलमा ने शिरकत की थी।
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