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हेलमेट न लगाना समझ रहे शान, बेशक चली जाए जान

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सहारनपुर। न तो हेलमेट है और न ही लाइसेंस, इसके बाद भी बाइक तथा स्कूटी पर बैठकर हवा से बातें कर रहे हैं छात्र। सहारनपुर में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। यहां किशोर, छात्र-छात्राओं को उनके अभिभावकों ने हादसों की चाबी उनके हाथ में थमा दी है। ये युवा हेलमेट न लगाकर चलना अपनी शान समझ रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं।
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शनिवार को स्कूलों की जैसे ही छुट्टी हुई, छात्रों ने बाइक स्टैंड से अपनी बाइक एवं स्कूटी निकाली, एक दो नहीं बल्कि तीन और चार छात्रों को बैठाया। फिर दौड़ पड़े सड़कों पर। न तो नियमों की परवाह और न किसी दुर्घटना की फिक्र। एक स्कूल की नहीं यह कहानी हर इंटरमीडिएट स्कूल की है। स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्रों की उम्र 18 साल से कम ही है। लेकिन अधिकांश छात्रों के हाथ में तेज रफ्तार की बाइक और स्कूटी उनके अभिभावकों ने थमा दीं हैं। न तो अधिकांश का अभी तक लाइसेंस ही बना और न ही अभिभावकों ने कभी अपने छात्रों को टोका है कि वे हेलमेट लगाकर स्कूल जाएं। यह भी आगाह नहीं किया कि बाइक अथवा स्कूटर पर दो से अधिक सवारियां न चलें।
कुछ दिन पूर्व दिल्ली रोड पर एक बाइक पर कक्षा 8 के छात्र की बाइक पर कक्षा 6 और कक्षा पांच का छात्र बैठकर फर्राटा भर रहे थे। बस की चपेट में आ गए और एक छात्र की मौत हो गई। अभिभावक ने उसकी एफआईआर इसलिए दर्ज नहीं कराई क्योंकि न तो छात्र के पास लाइसेंस था और न ही उसकी उम्र बाइक चलाने लायक थी और न ही उसके पास हेलमेट ही था। उस पर भी तीन सवारियां थी।
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यही हाल 19 जनवरी की रात को लिंक रोड पर दो छात्रों की मौत के मामले में कहानी सामने आई। कक्षा 10 के ये छात्रों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं लगा रखा था।
स्कूलों में दिलाया गया था यातायात के नियमों के पालन का संकल्प
सहारनपुर के प्रमुख स्कूलों में यातायात पुलिस द्वारा यातायात माह के तहत स्कूलों में कार्यक्रम कराकर छात्रों को जागरूक किया गया। यहां तक कहा गया कि यातायात के नियमों को छात्र तोड़ेंगे तो उनके अभिभावकों पर कार्रवाई होगी। यातायात पुलिस ने छात्रों को यातायात के नियमों का पालन किए जाने का संकल्प भी दिलाया गया। लेकिन यातायात के नियमों का कहीं पालन नहीं हो सका।
यातायात पुलिस रही नियम पालन कराने में फेल
छात्र एवं अन्य युवा हेलमेट पहनकर एवं दो से अधिक लोगों को बैठाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। लेकिन यातायात पुलिस न तो उन्हें रोक पा रही है और न ही उन पर कोई कार्रवाई ही कर पा रही है। यातायात पुलिस ने आज तक एक भी छात्र को रोक कर उसके अभिभावक का चालान नहीं किया है। जिससे अभिभावक किसी भी प्रकार का अंकुश छात्रों पर लगा सकें।
स्कूल संचालकों ने भी नहीं की सख्ती
प्रोग्रेसिव स्कूल्स फोरम के संयोजक सुरेंद्र चौहान का कहना है कि अधिकांश स्कूलों ने छात्रों के स्कूल में बाइक लाने पर रोक लगा दी है। लेकिन छात्र अभी भी मान नहीं रहे हैं। स्कूलों के आसपास के मकानों में अपने वाहन खड़े कर रहे हैं। सेंट मैरी स्कूल के आसपास कई घरों में बाइक स्टैंड बना लिए गए हैं। जहां छात्र अपने वाहन खड़े कर रहे हैं। इस मामले में वह एसएसपी से कार्रवाई किए जाने की मांग करेंगे।
पुलिस लगातार जागरूक कर रही है
पुलिस अधीक्षक यातायात विनीत भटनागर का कहना है कि यातायात पुलिस लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। बाइकर्स का चालान भी किया जा रहा है। हेलमेट के लिए मजबूर भी किया जा रहा है। यहां तक कि हेलमेट भी दिलवाया जा रहा है। लेकिन अपनी ही जान को जोखिम में डालकर चलना युवाओं एवं छात्रों का शगल बन गया है। लगातार इसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
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