सहारनपुर। लोकसभा और विधान सभा चुनाव में सर्वाधिक मतदान कराने के मामले में सहारनपुर प्रदेश में अव्वल रहा था। इसके लिए यहां के तत्कालीन डीएम की लखनऊ में वाहवाही हुई। मगर निकाय चुनाव में नंबर एक का ताज बचा पाना सहारनपुर के लिए चुनौती बनता नजर आ रहा है। इसकी प्रमुख वजह इस बार प्रशासन की ओर से मतदाताओं को जागरूक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाना है।
विधान सभा चुनाव 2017 के दौरान शफकत कमाल डीएम थे। उन्होंने सिविल डिफेंस, शिक्षा विभाग, पब्लिक स्कूलों और मीडिया को साथ लेकर जनपद में व्यापक स्तर पर मतदान के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया था, जो करीब एक महीने चला था। इसके तहत शहर में जगह-जगह होर्डिंग्स, बैनर और पंपलेट्स लगाए गए थे। स्कूली बच्चों ने रैलियां निकालकर मतदाताओं को सारे काम छोड़ दो सबसे पहले वोट दो के नारों के साथ जागरूक करने का काम किया था। स्कूलों में पोस्टर और अन्य प्रतियोगिताएं भी कराई गई थीं। यही वजह रही थी कि सहारनपुर का मतदान प्रतिशत 73.3 रहा था, जो प्रदेश में सबसे अधिक था। इसके लिए डीएम को लखनऊ में पुरस्कृत भी किया गया था। इससे पहले लोक सभा चुनाव 2014 में भी सर्वाधिक करीब 72 फीसदी मतदान कराने का ताज सहारनपुर के ही सिर पर सजा था। इसके लिए भी सहारनपुर जिला प्रशासन को शाबाशी मिली थी। मगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासन ऐसी कोई एक्टिविटी नहीं कर रहा है, जिससे मतदाताओं में जागरूकता आ सके। शायद यही वजह है कि इस बार मतदाताओं में भी जोश थोड़ा कम नजर आ रहा है।
लोक सभा और विधान सभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग ने कराया था। उनके स्तर से ही मतदाताओं की जागरूकता के लिए अभियान चलाने के आदेश थे। निकाय चुनाव छोटा चुनाव है, जिसके लिए इस प्रकार के कोई कोई निर्देश नहीं मिले हैं। फिर भी डीएम मतदाताओं को जागरूक करने के संबंध में बैठक ले रहे हैं।
एसके दूबे, एडीएम-प्रशासन।