...जो उसने लफ्जों का मरहम जबान पर रखा
देवबंद (सहारनपुर)। मोहल्ला लाल मस्जिद पर बज्मे अदब के तत्वावधान में एक शाम सईद अहसन जमशेदपुरी के नाम काव्य गोष्ठी व मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें कवियों व शायरों ने रचनाएं और कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम का उद्घाटन अरुण अग्रवाल, शमा रोशन डा. एसए अजीज एवं मो. नसीम अंसारी ने संयुक्त रूप से की। डा. शमीम देवबंदी ने कहा कोई गम पास आ नहीं सकता, मेरी मां की दुआ ही काफी है। सईद अहसन ने पढ़ा जिंदगी यूं तो बहुत कम है मुहब्बत के लिए, कैसे औकात निकल आते हैं नफरत के लिए। कमर उस्मानी ने पढ़ा नई उम्र के शाहेजादों ये मशविरा भी बगोर सुन लो, सजा के अपनी सिफात रखना छुपा के अपना शबाब रखना। शमीम किरतपुरी ने कहा खलिश तमाम हुई उम्र भर की लम्हों में, जो उसने लफ्जों का मरहम जबान पर रखा। चांद देवबंदी ने पढ़ा तू दे रहा है भीख जो सिक्का उछालकर रख देगा वो गुरूर को पल में निकाल कर। डा. सादिक देवबंदी ने पढ़ा हुस्ने अखलाक से है हंसी जिंदगी, आदमी से मिलो आदमी की तरह। डा. अदनान अनवर ने कहा प्यार बेचा भी गया खरीदा भी गया, काश इस दिल का भी बाजार में सौदा होता। नदीम शाद ने पढ़ा कभी नसीब कभी जिंदगी से हार गए, तुम्हारे बाद तो हम हर किसी से हार गए। अब्दुल्ला राज ने कहा ठोकर लगी उसको तो जमी याद आ गई, बातें जो कर रहा था बहुत आसमान से। इनके अलावा चौकस देवबंदी, जिगर देवबंदी, डा. फरमान, नूर देवबंदी, समी देवबंदी आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। संचालन गुलजार बेग ने किया। इस मौके पर मौलाना कमर उस्मानी, शुऐब कुरैशी, सलीम अंसारी, डा. शारिक, दानिश, नवेद, फहीम, लबीब, पुष्पेंद्र कुमार, शाहिद अंसारी आदि रहे।