हाईवे पर धरना दे रहे किसानों ने मजदूरों को काम करने से रोका
सरसावा। हाईवे के समानांतर सर्विस रोड की मांग को लेकर धरनारत किसानों ने हाइवे के कामगारों को काम करने से रोकते हुए मिट्टी तथा अन्य सामानों से लदे वाहन भी रोक लिए। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी होती वे हाईवे पर काम नही होने देंगे। हालांकि एनएच के अधिकारियों से वार्ता के बाद किसानों ने खनन सामग्री से लदे वाहनों के आवागमन को तो मंजूरी दी। लेकिन धरनास्थल के समीप काम करने से रोक दिया। पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी किसानो के बीच पहुंच उनकी मांग का समर्थन किया।
सर्विस रोड़ की मांग को लेकर 12 दिन से धरनारत किसानों ने हाइवे कर्मचारियों को काम करने से रोक दिया। शनिवार को हाइवे अथॉरिटी के मजदूर मिट्टी से भरे डंपर और सामान से भरी ट्रॉली के साथ धरनास्थल के समीप हाइवे किनारे मिट्टी डालकर समतलीकरण कर रहे थे। लेकिन किसानों ने विरोध करते हुए काम रुकवा दिया। धरने पर बैठे मांगेराम प्रधान, आशीष, रजनीश, विनय आदि ने काम रोकते हुए कहा कि पहले झबीरण तथा आसपास के दस गांवों को सर्विस रोड मिलनी चाहिए तभी काम करने दिया जाएगा।
इसके बाद हाईवे पर काम करने वाले मजदूरों ने अधिकारियों को किसानों के विरोध की जानकारी दी। बाद में अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच वार्ता हुई। वार्ता में किसानों ने खनन सामग्री से लदे वाहनों के आवागमन पर तो सहमति दे दी। लेकिन धरनास्थल के आसपास काम कराने से रोक दिया। वहीं, शनिवार को किसानों के बीच पहुंचे पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने झबीरण के लोगों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि मोर्चा किसानों के निर्णय के साथ है। उन्होंने कहा कि किसानों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। धरने पर बिरमपाल, कालूराम, प्रदीप, विनय, बिजेंद्र, आशिक, शकील, सईद, अब्दुल रहमान, मुस्तफा, मुस्तकीम, सुंदर, मतलूब मौजूद रहे।