सहारनपुर। सलाखों ने मजबूर कर दिया, गुनाहों ने मुझे अपनों से दूर कर दिया, तन्हाई में मेरे अपनों की यादों ने, मेरी जिंदगी को बे नूर कर दिया। ये पंक्तियां किसी बड़े शायर की नहीं, बल्कि जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी नीटू की है, जिसे गुनाह ने अपनों से दूर कर दिया और ऐसी तन्हाई मिली कि जिंदगी के वो सुनहरे लम्हे जो अपनों के बीच बिताने थे, सलाखों के पीछे बेनूर होकर रह गए। जिंदगी की इस बेरुखी और अपनों की याद में मन में उत्पन्न हुई भावनाओं को उसने अपनी कलम से कागजों पर उतारना शुरू किया तो काव्य बनता चला गया। अब तक नीटू दो हजार से अधिक कविताएं जेल में रहते हुए लिख चुका है। बंदियों के बीच अपनी कविताओं से लोकप्रिय हो चुके शहर के मोहल्ला हकीमपुरा निवासी नीटू कुमार 2011 से जिला कारागार में हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। नीटू ने बताया कि सजा होने के बाद उसने अपनी जिंदगी से जैसे हार की मान ली थी, लेकिन जब उसने बंदियों को पढ़ने के लिए आगे बढ़ते देखा तो वह भी पढ़ने को आतुर हुआ। उसने जेल अधिकारियों से पढ़ने की इच्छा जाहिर की। उसने हाईस्कूल का फार्म भरा, जेल में ही पढ़ाई की और हाईस्कूल की परीक्षा पास की। उसे कविताएं लिखने के बारे में पहले कभी सोचा नहीं था, लेकिन जब अकेला रहने लगा तो उसे परिवार और जेल से बाहर की दुनिया याद आने लगी, वह किसी प्रकार उसे महसूस करना चाहता था। फिर जो भाव मन में उठते गए तो उन्हें भावनात्मक रूप से शब्दों में पिरोकर कागज पर लिखने लगा। घर पर अपने परिवार के साथ जो समय बिताया था, उस समय को याद कर कविताएं बनाईं। अभ्यास बढ़ता गया और कई रजिस्टर बना दिए। उसके बाद उसने लगभग बीस से अधिक गीत और गजल लिखीं। अब तक दो हजार से अधिक कविताएं लिख चुका है। उसे अपने परिवार की भी याद आती है। अब लगता है कि उसके साथ क्या हो गया। उसकी लिखी एक लाइन उसके भाव बताती हैं। जीवन अपना सूना-सूना सा हो गया, ए रब्बा मेरे साथ ये क्या हो गया।
नीटू ही नहीं, जिला कारागार में हत्या के ही आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे देवबंद के ग्राम दुगचढ़ा निवासी पुष्पेंद्र ने भी कविताओं को अपने एकांत का सहारा बनाया। अंग्रेजी से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त करने वाले पुष्पेंद्र ने बताया कि वह 11 साल से जिला कारागार में बंद हैं। एक बेटी और दो बेटों के पिता पुष्पेंद्र ने बताया कि जेल में आने के बाद जब उनसे खाली समय नहीं कट पाया तो उन्होंने काव्य लिखना शुरू किया। उन्हें भी अपनों की याद ने रचना लिखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपनी अधिकांश रचनाएं विरह की ही लिखीं हैं। ‘न मंजिल है, न काफिला है, बस एक वक्त है, रूठा हुआ सा हमारे साथ’।
जेल से कर रहे हैं पढ़ाई
जिला कारागार में विभिन्न आरोपों में बंद युवक अपनी पढ़ाई भी कर रहे हैं। वर्ष 2018 में चार बंदियों ने हाईस्कूल एवं दो ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की, जबकि वर्ष 2019 में हाईस्कूल के तीन और इंटरमीडिएट के तीन बंदियों ने परीक्षा के लिए फार्म भरा है। इसके अलावा आगे की शिक्षा के लिए इग्नू के माध्यम से फार्म भरवाकर परीक्षा दिलवाई जाती है। हालांकि इस बार किसी भी बंदी द्वारा इग्नू के माध्यम से परीक्षा के लिए फार्म नहीं भरा जा सका है। सिर्फ देहरादून में ही इग्नू का सेंटर अधिकृत है, लेकिन वह दूसरे राज्य का है।
काव्य संग्रह कराया जाएगा प्रकाशित : शर्मा
जिला कारागार अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि कारागार में कुछ बंदियों ने अच्छी रचनाएं लिखी हैं। नीटू और पुष्पेंद्र ने सराहनीय रचना लिखी है। उनके भावों में संवेदना झलकती है। जिला कारागार की तरफ से इनका काव्य संग्रह प्रकाशित कराया जाएगा। जिस पर काम शुरू करा दिया गया है। प्रकाशन के लिए प्रक्रिया की जा रही है।