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प्रशासन और निगम के लिए चुनौती बने जर्जर भवन

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इस आपदा के लिए तैयार नहीं था नगर निगम
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सहारनपुर। जिले भर में जर्जर भवनों की संख्या हजारों में है। तीन सौ से अधिक जर्जर भवन अकेले शहरी क्षेत्र में हैं, जिनमें सौ से अधिक भवन सौ वर्ष से अधिक पुराने हैं। इन जर्जर भवनों में हजारों परिवार रहते हैं, बरसात में जिनकी जिंदगी हर वक्त दहशत के साये में रहती है।
बरसात के दिनों में जर्जर भवनों के गिरने से प्रत्येक वर्ष आधा दर्जन लोग जान गंवाते हैं। घटनाओं से सबक लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने करीब चार साल पहले जर्जर भवनों केे चिन्हित किया था, जिसका मकसद जर्जर भवनों को गिराना था, जिससे कि कोई हादसा न हो। मगर नगर निगम आज तक एक भी जर्जर भवन को नहीं गिरा सका है। सौ वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों की बात करें तो उनमें से ज्यादातर इमारतों में रह रहे लोगों के बीच कब्जे को लेकर कानूनी झगड़े चल रहे हैं, जिनके मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। यही वजह है कि नगर निगम आज तक इन भवनों पर कार्रवाई नहीं कर सका है। नगर निगम नोटिस जारी कर जर्जर भवनों में रह रहे लोगों को भवनों की मरम्मत कराने की बात कह चुका है।
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नाले और नालियों की सफाई न होने से बढ़ी मुसीबत
सहारनपुर। तीन दिन से लगातार हो रही बारिश से पूरा शहर जलमग्न है। गलियों और सड़कों पर जलभराव की वजह से लोग परेशान हैं। कई निचले इलाकों के घरों में पानी घुस गया है। इस तमाम अव्यवस्था के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। इस बार बरसात से पहले नाले और नालियों की सफाई नहीं कराई गई है। कई नाले ऐसे हैं, जिनकी कई साल से सफाई नहीं की गई है। इस बार पहले तो नालों की सफाई के लिए टेंडर की प्रक्रिया देर से शुरू की गई। दूसरे इनमें तमाम गड़बड़ियां थीं, गड़बड़ी की शिकायतें कमिश्नर से हुईं तो उन्होंने नालों की सफाई के सभी दस ठेकों को निरस्त करने के निर्देश दिए। ठेके निरस्त होने की वजह से आज तक नालों की सफाई नहीं हो सकी है। इसी वजह से शहर में भारी जलभराव की समस्या बन रही है।
70 प्रतिशत गिरा कारोबार, तीन दिन से ठंडा है बाजार
सहारनपुर। बारिश के लगातार होने की वजह से तीन दिन से शहर के बाजार भी ठंडे पड़े हैं। लोगों के खरीदारी करने के लिए घरों से न निकलने की वजह से बाजारों में सन्नाटे जैसे हालात हैं, जिसकी वजह से दुकानदार मायूस हैं। व्यापारी नेता राधेश्याम नारंग ने बताया कि बरसात की वजह से कपड़ा मार्केट खाली पड़ा है। ग्राहक नहीं आने की वजह से दुकानदार परेशान हैं। ग्राहकों की संख्या में 70 फीसदी तक की कमी है। जनरल स्टोर स्वामी राजीव गुप्ता ने बताया कि बरसात की वजह से ग्राहक बाजार में नहीं आ रहा है। इसकी वजह से राशन विक्रेताओं का व्यापार भी मंदा है।
जिम्मेदार तो आप भी हैं
सहारनपुर। जलभराव के लिए आम आदमी भी जिम्मेदार है। दरअसल, अनेक व्यापारी और आम नागरिक कचरे को डस्टविन या कूड़ेदान में डालने के बजाय खुले में फेंक देते हैं, जो बारिश के पानी के साथ बहकर या हवा में उड़कर नाले और नालियों में चला जाता है। जैन कॉलेज रोड, चिलकाना रोड, अंबाला रोड आदि में काफी दुकानदार सफाई कर कचरा भरते आ रहे हैं, जिसकी वजह से नाली पूरी तरह बंद है। नगर निगम कई बार गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुका है, मगर आज तक एक भी व्यक्ति का चालान नहीं काटा है।
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कच्चे मकान वालों को कराया गया शिफ्ट
सहारनपुर। लगातार हो रही बारिश के चलते हुए नुकसान को देखते हुए प्रशासन ने एलर्ट जारी कर दिया है। जो लोग कच्चे मकान में रह रहे हैं उनको वहां से निकालकर पक्के मकानों में शिफ्ट करा जा रहा है। हथिनी कुंड से छोडे़ गए पानी को देखते हुए बाढ़ से बचाव के लिए सभी संसाधनों को तैयार कर लिया गया है। इसमें नाव से लेकर लाइफ जैकेट्स आदि शामिल हैं। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विनोद कुमार ने बताया कि तमाम प्रशासनिक अमले को इस कार्य में लगा दिया है।
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