देवबंद (सहारनपुर)। चुनाव में वोटों की खरीद फरोख्त किए जाने को लेकर मदरसा दारुल उलूम निस्वा के मोहतमिम मौलाना अब्दुल लतीफ ने कहा कि वोट एक शहादत (गवाही) है। शरीयत में अपनी गवाही को बेचना जायज नहीं है।
शुक्रवार को मौलाना अब्दुल लतीफ ने कहा कि इस्लाम गुलामी को पसंद नहीं करता इस्लाम आजादी चाहता है। आजादी का मतलब यह है कि जिसकी राय आजाद हो और जिसके हक में चाहे अपनी राय (वोट) दे। गुलाम उसे कहा जाता है जिसे अपनी राय देने का हक न हो। जो वोट देने का हक न रखता हो वो गुलाम है। इसलिए अपने वोट को बेचना शरीयत के हिसाब से दुरुस्त नहीं है। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करना है तो वह गुनहगार है और शरीयत की नजर में वह बहुत बड़ा मुजरिम है। उन्होंने कहा कि वो व्यक्ति सबसे बुरा है जो अपना वोट बेचता है। साथ ही वो लोग प्रजातंत्र का मजाक उड़ाते हैं जो पैसे देकर वोट खरीदते हैं। कहा कि प्रजातंत्र ही हमारे मुल्क की असल पहचान है। पूरी दुनिया के अंदर प्रजातंत्र की वजह से ही भारत का लोहा माना जाता है। अगर भारत में वोट खरीदे जाने लगे तो हमारी जमहूरियत कमजोर हो जाएगी। इससे देशवासियों को नुकसान पहुंचेगा और इस काम के लिए इस्लाम कतई इजाजत नहीं देता।