सहारनपुर। नगर निगम की ओर से जिन 38 हजार व्यावसायिक भवन स्वामियों को जीआईएस सर्वे आधारित नोटिस जारी किए गए थे। उनमें से मात्र 800 ने ही स्वकर निर्धारण प्रणाली के प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराया है। ऐसे लोगों पर अब ब्याज लगाया जाएगा। जीआईएस सर्वे में महानगर में कुल 2.13 लाख संपत्तियां सामने आई हैं। इनमें 1.81 लाख संपत्तियां भवन के रूप में हैं, जबकि शेष प्लॉट आदि हैं। इन 1.81 लाख संपत्तियों में 38 हजार संपत्तियां व्यावसायिक हैं, जिनमें दुकान, शोरूम, फैक्टरी, गोदाम आदि शामिल हैं। नगर निगम ने करीब छह महीने पहले व्यावसायिक संपत्तियों के स्वामियों को जीआईएस सर्वे आधारित नोटिस जारी किए थे। नोटिसों में संपत्तियों का टैक्स कई गुणा तक बढ़ जाने पर व्यापारियों और उद्यमियों ने विरोध जताया था।
ऐसे में नगर निगम बैकफुट पर आया था और व्यापारियों से आपत्तियां देने को कहा था। करीब 5.5 हजार व्यापारियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। आपत्तियों के निस्तारण के लिए गृहकर एवं जलकर अनुभाग के कर्मचारियों को मौके पर जाना पड़ रहा था। ऐसे में आपत्तियों के निस्तारण में मशक्कत के साथ ही समय भी अधिक लग रहा था।
इसके बाद नगर निगम ने स्वकर निर्धारण प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया और व्यापारियों से कहा कि वह स्वकर का प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराएं। इसके लिए शिविर लगाए गए थे। निगम अधिकारियों ने बताया कि तीन दिन के शिविरों में 600 लोगों ने प्रपत्र भरते हुए टैक्स जमा कराया था। अभी तक करीब 800 ही लोगों ने प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराया है।
यानी करीब 37 हजार व्यापारी और उद्यमियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है कि उन्होंने जीआईएस सर्वे आधारित टैक्स जमा कराया है या नहीं।