गंगोह (सहारनपुर)। अधिक मूल्य और ज्यादा सुविधाएं मिलने के चलते किसान अपना गेहूं यूपी के बजाय हरियाणा में बेच रहे हैं। इसके चलते रबी खरीद योजना के तहत खोले गये सरकारी गेहूं खरीद क्रय केंद्र सूने पडे़ है।
बता दें कि मंडी समिति गंगोह अंतर्गत सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी एजेंसियों के नौ क्रय केंद्र खोले गए हैं। सभी क्रय केंद्रों पर मंडी समिति द्वारा तमाम व्यवस्थाएं अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ही कराई जा चुकी है। आरएफसी के मंडी परिसर में खुलने वाले गेहूं क्रय केंद्र पर 10 अप्रैल को 26 कुंतल गेहूं खरीद कर शुरुआत भी की जा चुकी है। इसके विपरीत अन्य क्रय एजेंसियों भारतीय खाद्य निगम के लखनौती, पीसीएफ के तीतरो, रंधेडी, बीनपुर एवं सुखेड़ी (लखनौती) और पीसीयू के सलारपुरा, गंगोह और जांडखेड़ा में गेहूं क्रय केंद्र खोले गये है। मगर अभी तक केवल मंडी स्थित आरएफसी सेंटर पर मात्र 58 कुंतल गेहूं की ही खरीद हो सकी है। हालांकि सभी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में पैसा और बारदाना उपलब्ध करा दिया गया है। ऐसा नही है कि किसान सरकारी क्रय केंद्र पर ही गेहूं नही ला रहा है बल्कि इस बार किसानों का मंडियों में व्यापारियों से भी मोहभंग हुआ नजर आ रहा है। जहां इस वर्ष अब तक मंडी में मात्र 685 कुंतल गेहूं ही आ पाया है। वही गत वर्ष इसी अवधि में मंडी में आवक 3719 कुंतल हुई थी। एसएमआई मनोज कुमार गौतम ने बताया कि निर्धारित मानकों के अनुरूप गेहूं आवक नहीं होने से गेहूं खरीद नही हो पा रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा की मंडियों में किसानों को व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य के अतिरिक्त भी पैसा दिया जा रहा है। जिसके चलते अधिकांश किसान अपना गेहूं हरियाणा की सीमावर्ती मंडियों में बेचना पसंद कर रहे हैं। मंडी सचिव अशोक कुमार ने भी उनकी बात की पुष्टी करते हुए कहा कि हरियाणा में व्यापारियों के माध्यम से होने वाली खरीद यहां गेहूं के कम आने का एक बड़ा कारण है। मनोज गौतम ने बताया कि गेहूं खरीद में आ रही समस्याओं को देखते हुए उन्होंने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।