सहारनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नवनिर्वाचित महापौर संजीव वालिया से हुई मुलाकात में शहर को स्वच्छ करने के निर्देश का अब तक असर सहारनपुर में ना के बराबर नजर आ रहा है। आलम यह है कि शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर जी का जंजाल बन गए है। इतना ही नहीं, शहर से कचरा उठाकर बाहर फेंकने के लिए भी निगम के पास अब जगह नहीं बची है। लोगों की नजर से बचाकर कमेला क्षेत्र में कचरा डाला जा रहा है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। क्षेत्र में गंदगी की वजह से बीमारियां भी पनप रही हैं।
अक्तूबर 2009 में बना नगर निगम अभी तक कचरा निस्तारण के लिए जमीन नहीं तलाश सका है। ऐसे में नगर निगम के सफाई कर्मचारी प्रति दिन शहर से कचरा इकट्ठा कर शहर के बाहर फेंक रहे हैं। पहले यह कचरा चिलकाना रोड पर फेंका जा रहा था, जिसके बाद पुराना कलसिया रोड पर म्यूनिसिपल कॉलोनी के पास डाला गया। वर्तमान में नगर निगम कमेला कॉलोनी क्षेत्र में कचरा डाल रहा है, जिसकी वजह से कचरे का टीला बन गया है। कचरे के इस टीले पर दिनभर चील और कौवे तथा अन्य जानवर मंडराते हैं। मच्छर और मक्खियां कचरे पर बैठने के बाद बीमारियां बांट रहे हैं। इसकी वजह से क्षेत्रवासी परेशान हैं, जो कई बार विरोध भी जता चुके हैं। इतना ही नहीं, शहर के बाहर चारों ओर कचरा डालने के बाद अब नगर निगम के पास कचरा डालने के लिए कोई विकल्प भी नहीं बचा है। प्रतिदिन शहर से निकलने वाले करीब ढाई सौ टन कचरे को ठिकाने लगाना नगर निगम के लिए लगातार चुनौती बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने मेयर को दिए थे विशेष निर्देश
शहर के प्रथम मेयर संजीव वालिया ने पांच दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री ने मेयर की तमाम समस्याएं सुनने के बाद उन्होंने सफाई पर विशेष जोर देने की बात कही थी। बकौल मेयर, प्रधानमंत्री ने स्वच्छता की बात कई बार उठाई और स्वच्छता अपनाने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा था।
सड़कों पर चल रही डेयरियां फैला रही गंदगी
नियमानुसार पशुओं को सड़कों पर नहीं बांधा जा सकता। मगर शहर में अनेक जगहों पर पूरी डेयरियां ही सड़कों पर चल रही हैं। चकराता रोड पर पुरानी चुंगी से बीडी बाजोरिया इंटर कॉलेज तक सैकड़ों की संख्या में पशु सड़कों पर बांधे जा रहे हैं। यह पशु दिनभर सड़क पर गोबर और पेशाब कर गंदा कर रहे हैं। अन्य जगहों पर भी इस तरह की डेयरियां चल रही हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के आदेश दिए हुए हैं। सहारनपुर की सड़कों पर गायों, कुत्तों के अलावा अन्य पशु भी दिन भर सड़कों पर रहते हैं। इनकी संख्या 5000 से अधिक आंकी गई है। मगर नगर निगम ने अभी तक इन पशुओं को हटाने की जहमत नहीं उठाई है।
डेढ़ हजार से अधिक कर्मचारी, फिर भी गंदगी
नगर निगम के पास करीब 1450 सफाईकर्मी हैं। इसके अलावा आठ इंस्पेक्टर और अन्य अधिकारी सफाई के काम से जुड़े हैं। कचरा उठाने के लिए बड़ी संख्या में ट्रक, छोटे वाहन, रेहड़ियां, जेसीबी और अन्य वाहन हैं। इसके बावजूद शहर में कचरे के ढेर लगना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
32 गांवों में नहीं कूड़ेदान
शहर से सटे 32 गांवों को मिलाकर नगर निगम बनाया गया था। ज्यादातर गांवों में नगर निगम आज तक कूड़ेदान नहीं रखवा सका है। ऐसे में लोग सड़क किनारे कचरा डाल रहे हैं, जिसको उठाने तक की कोई व्यवस्था नगर निगम ने अभी तक नहीं की है। उदाहरण के तौर पर गांव ज्ञानागढ़ में लोग ग्राम पंचायत की जमीन पर कचरा डाल रहे थे। नगर निगम ने उक्त जमीन पर सार्वजनिक शौचालय बनाया है। उसके बाद लोगों के पास कचरा डालने के लिए जगह नहीं बची है।
खाद बनाने में खर्च हो रहा केवल दस फीसदी कचरा
कुछ एनजीओ शहर में कचरे से खाद बना रहे हैं। एनजीओ के कर्मचारी नगर निगम के सहयोग से घर-घर से कचरा इकट्ठा करते हैं, जिसका घरों से शुल्क भी वसूला जाता है। इस कचरे को एक स्थान पर ले जाकर अलग-अलग किया जाता है, जिससे खाद बनाई जाती है। मगर एनजीओ द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कचरे की मात्रा कुल कचरे की मुश्किल से दस फीसदी ही है।
स्वच्छता सर्वे में रहे थे फिसड्डी
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष देश के चुनिंदा 400 शहरों का स्वच्छता सर्वेक्षण कराया था। इनमें सहारनपुर भी शामिल था। स्वच्छता सर्वेक्षण में सहारनपुर का 234वां स्थान रहा था। अब दूसरा स्वच्छता सर्वेक्षण चार जनवरी 2018 से शुरू हो रहा है। इस बार के सर्वेक्षण में भी सहारनपुर शामिल है।
यहां लगते हैं कचरे के ढेर
शहर में कचरा डालने के लिए अनेक प्वाइंट बने हैं। दिल्ली रोड पर सब्जी मंडी के पास, कोर्ट रोड पर कचहरी पुल के नीचे, जीपीओ रोड पर पुल के पास, खलासी लाइन में पुलिस चौकी के नजदीक, पांवधोई नदी से सटे बोमंजी रोड पर, जामा मस्जिद के सामने, दालमंडी पुल पर, पुल खुमरान पर, धोबीघाट पर, नुुमाइश कैंप में गोशाला के बगल समेत अनेक जगहों पर कचरा डाला जा रहा है। नगर निगम इस कचरे का उठान दोपहर दो बजे तक करता है। यानी सुबह पांच बजे से दोपहर दो बजे तक लोगों को कचरे से जूझना पड़ता है।
कचरा प्रबंधन के लिए जमीन तलाश ली गई है। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन को लेकर नगर निगम पूरी मेहनत के साथ काम कर रहा है। कर्मचारी सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक काम कर रहे हैं। जनवरी में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर भी हमारी तैयारी पूरी है।
डॉ. गीताराम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
पांच दिसंबर को दिल्ली मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को लेकर विशेष दिशा निर्देश दिए हैं। शपथ ग्रहण के बाद हम शहर को साफ सुथरा बनाने में शत प्रतिशत कार्य करेंगे। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संजीव वालिया, मेयर।