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छल कपट वाले मानव को नहीं अपनाते प्रभु श्रीराम : प्रियदास

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छल कपट वाले मानव को नहीं अपनाते प्रभु श्रीराम : प्रियदास
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देवबंद (सहारनपुर)। रामकथा में चौथे दिन वृंदावन के संत प्रियदास जी महाराज ने नारद मोह की लीला का वर्णन किया। बताया कि नारद को अभिमान हो गया था इसलिए नारायण श्री विष्णु ने उनका अभिमान तोड़ा था।
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श्री गीता प्रचार समिति के तत्वावधान में श्री गीता भवन में चल रही रामकथा की अमृत वर्षा करते हुए संत प्रियदास जी महाराज ने कहा कि श्रीराम चरित्रमानस में नारद मोह की लीला के पश्चात ही भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग शुरू होता है। मनुष्य को कभी अभिमानी नहीं होना चाहिए। मनुष्य को ऐसे कार्य करने चाहिए जो आत्मा परमात्मा को प्राप्त हो सके। पिछले जन्मों में किए गए पाप पुण्य ही मानव को भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य को प्रभु को भाव से नहीं भजते तब तक प्रभु चरणों की अनुमति नहीं होती है। जिस मानव के हृदय में हमेशा छल-कपट रहता है उसे प्रभु श्रीराम नहीं अपनाते। प्रभु को दिखावा अच्छा नहीं लगता। प्रभु तो प्रेम के भूखे होते हैं। दीन दुखियों की सेवा करना ही पुण्य कार्य है। श्रीराम कथा धर्मयज्ञ होती है। इसमें सभी भक्तों का सहयोग होना जरूरी है। रामकथा के यजमान प्रदीप शर्मा रहे जबकि प्रसाद वितरण नीरज गर्ग ने किया। इस मौके पर पं. विनय प्रकाश तिवारी, अजय बंसल, सुधीर गर्ग, पंकज अग्रवाल, अंकित मित्तल, विवेक शर्मा, बनारसी प्रसाद अग्रवाल, राजकुमार गर्ग, नीरज मित्तल, सुशील कर्णवाल, सरोज शर्मा, अनीता मित्तल, मंजू शर्मा, डा. कांता त्यागी आदि मौजूद रहे।
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