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‘ना सुनो गर बुरा कहे कोई’

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‘ना सुनो गर बुरा कहे कोई’
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सहारनपुर। उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब के 221वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में परचम संस्था की ओर से गजल गायन और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
शहर में पक्का बाग स्थित परचम संस्था के कार्यालय पर हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इस्लामिया इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य जलाल उमर ने कहा कि मिर्जा गालिब ने 21 वीं सदी में होने वाले बदलावों को महसूस कर लिया था और रोजमर्रा की जुबान को इस तरह अपने कलाम में इस्तेमाल किया कि वह आम जुबान बन गई। उनका शेर पढ़ा- ना सुनो गर बुरा कहे कोई, न कहो गर बुरा करे कोई, रोक लो गर गलत चले कोई, बख्श दो गर खता करे कोई।
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अध्यक्षता करते हुए डाक्टर कुदसिया अंजुम ने कहा कि मिर्जा गालिब की रचनाएं हिंदुस्तान की साझा तहजीब के हुस्न और जमाल का यादगार मजहर हैं। दुनिया भर की भाषाओं में उनकी शायरी और गद्य का अनुवाद हो चुका है। पवन राना और फरजाना शेख ने भी विचार रखे। भाषण प्रतियोगिता में शुमायला, शमा, शहजादी, उजमा, आएशा, अर्शी ने मिर्जा गालिब के जीवन पर प्रकाश डाला। भाषण प्रतियोगिता में शुमायला ने प्रथम, उजमा ने द्वितीय और नशरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, गजल गायन में अर्शी जैदी ने गजल सुनाई- ये ना थी हमारी किस्मत के बिसाले यार होता, अगर और जीते रहते यही इंतजार होता। खुशलू खान ने पढ़ा- हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है, तुम्ही कहो के ये अंदाज ए गुफ्तगू क्या है। शुमायला ने पढ़ा- आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक, कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक। नशरा ने पढ़ा- दिले नादां तुझे हुआ क्या है, आखिर इस दर्द की दवा क्या है। कार्यक्रम का संचालन नुसरत परवीन ने किया। इस दौरान अरीना, नेहा, आकरीन, आयशा, फरहा, बुशरा, वजीहा, इरम आदि मौजूद रहीं।
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