जिले में बिगड़ रही मिट्टी की सेहत
सहारनपुर। जिले में मिट्टी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की जांच में यह हकीकत सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार जिले की सभी तहसीलों में जीवांश कार्बन के साथ ही अन्य पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। इससे फसल का उत्पादन प्रभावित हो रहा है और फसलों की लागत भी बढ़ रही है।
प्रयोगशाला में करीब मिट्टी के 52214 नमूनों की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में तहसील नकुड़ के 17616 नमूनों में से 88 प्रतिशत में जीवांश कार्बन, 88 प्रतिशत में ही नाइट्रोजन, 73 प्रतिशत में फास्फोरस और 81 फीसदी में पोटाश की मात्रा मानक से कम पाई गई। तहसील सदर के 8162 नमूनों में से 90 प्रतिशत में जीवांश कार्बन और नाइट्रोजन, 70 फीसदी में फास्फोरस और 80 प्रतिशत में पोटाश की मात्रा कम पाई गई। देवबंद और रामपुर मनिहरान तहसीलों से आए 19033 नमूनों की जांच में 86 फीसदी में जीवांश कार्बन और नाइट्रोजन, 78 प्रतिशत में फास्फोरस और 84 प्रतिशत नमूनों में पोटाश की मात्रा कम रही।
बेहट तहसील के 7403 नमूनों में से जीवांश कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा 88 प्रतिशत में, फास्फोरस 81 प्रतिशत में और पोटाश 89 प्रतिशत नमूनों में कम मिला। सहायक निदेशक मृदा परीक्षण रामजतन मिश्र ने बताया कि पोषक तत्वों की कमी से फसल की उत्पादकता प्रभावित होती है। ऐसे में किसानों को संतुलित उर्वरकों का प्रयोग और फसल चक्र अपनाना चाहिए।
गांव नंदी फिरोजपुर के किसान प्रदीप नंबरदार और गांव चंदपुरा के अनवर अली का कहना है कि मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसल की लागत में कमी आती है। साथ ही उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।
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खेत से ऐसे लें मिट्टी का नमूना
- किसी किसान को जिस खेत से नमूना लेना हो, उसमें आठ से दस स्थानों पर पहले छह गुणा चार इंच के छह गड्ढे खोद लें। इसके बाद खुर्पी से इन गड्ढों से 2.5 सेंटीमीटर ऊपरी परत ले लें। इसे एक स्थान पर मिलाकर इसमें से आधा किलो मिट्टी साफ थैली में भरकर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला को भिजवाना चाहिए। ।
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मृदा स्वास्थ्य सुधारने के उपाय
- फसल चक्र को अपनाएं, दलहनी फसल को जरूर शामिल करें।
- गोबर, कंपोस्ट और हरी खाद का नियमित प्रयोग करें।
- फसल अवशेषों को काटकर मिट्टी में मिला दें।
- रासायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करें।
- फसल बुआई से पहले भूमि शोधन अवश्य करें।
- फसल बुआई से पहले मृदा परीक्षण अवश्य कराएं
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- जिले में अब तक 52215 नमूनों का मृदा परीक्षण हुआ है। इनमें से अधिकांश में जीवांश कार्बन, नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों के साथ ही सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी पाई गई है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन के साथ ही लागत पर भी पड़ता है। मिट्टी के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए किसानों को गोबर, वर्मी कंपोस्ट और हरी खाद का नियमित प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा किसान फसल चक्र में दलहनी फसल को अवश्य शामिल करें।
- रामजतन मिश्र, सहायक निदेशक मृदा परीक्षण।