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16 वर्षों से निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं पंडित श्यामलाल

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गंगोह (सहारनपुर)। आज के युग में जहां परिषदीय विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक भरपूर तनख्वाह लेकर भी संतोषजनक कार्य नहीं करते, वहीं एक 80 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक पिछले 16 वर्षो से विभिन्न विद्यालयों में निशुल्क रूप से बच्चों को शिक्षा देकर देश सेवा में लगा है। उनका सपना है कि देश का प्रत्येक बच्चा शिक्षा हासिल कर जीवन में मुकाम हासिल करें।
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गांव खालिदपुर निवासी करीब 80 वर्षीय पंडित श्यामलाल गांव दूधला स्थित राजकीय जूनियर हाई स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात थे। वर्ष 2002 में वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने शिक्षण कार्य जारी रखा और अपने घर पर ही बच्चों को निशुल्क रूप से कोचिंग देते रहे। इसके अलावा उन्होंने अनेक विद्यालयों में अपनी निशुल्क सेवाएं देते हुए बच्चों को शिक्षित किया। गत वर्ष उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर राष्ट्रसेवा के लिए निशुल्क अवैतनिक किसी परिषदीय विद्यालय में शिक्षण कार्य करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। उनकी शिक्षा एवं राष्ट्रसेवा के प्रति भावना को देखते हुए 2017 में शिक्षक दिवस के मौके पर जिला विद्यालय निरीक्षक आर के तिवारी द्वारा खादर क्षेत्र के गांव लखनौती स्थित राजकीय हाईस्कूल में निशुल्क रूप से शिक्षण कार्य के लिए अनुमति प्रदान कर दी गई। तब से वह उक्त विद्यालय को अपनी निशुल्क सेवा देकर बच्चों को शिक्षित करने के कार्य में लगे हैं।
जज्बे के आगे ठहर गई बढती उम्र
गंगोह। शिक्षा एवं राष्ट्रसेवा को समर्पित पंडित श्यामलाल के जज्बे के आगे मानो उनकी उम्र भी ठहर गई है। करीब अस्सी वर्ष की आयु में भी वह नियमित रूप से विद्यालय जाते है और पूरे मनोयोग से बच्चों को पढ़ाते हैं। पंडित श्यामलाल ने बताया कि वह आजीवन निशुल्क रूप से शिक्षणकार्य करने का संकल्प ले चुके हैं और वह देश के किसी भी कोने में शिक्षा सेवा देने को सहर्ष तैयार हैं। उनका सपना है कि देश का एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे।
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आदर्श राष्ट्रगुरु के रूप में सम्मानित करने की मांग
गंगोह। गांव खालिदपुर के ग्राम प्रधान मोहनलाल, पूर्व प्रधान जसवंत कश्यप, रामपाल, राकेश कुमार, महकसिंह सहित ग्रामीणों ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उन्हें आदर्श राष्ट्रगुरु के रूप में सम्मानित किए जाने की मांग की है।
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