कृषि वैज्ञानिकों ने दिए फसल अवशेष प्रबंधन के टिप्स
सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र सभागार में आयोजित कृषक गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि धान की पुआल को मिट्टी में मिलाकर सड़ा देने से मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। उन्होंने वेस्ट डी कंपोजर के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बुधवार को आयोजित गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वेस्ट डी कंपोजर की प्रयोग विधि की जानकारी किसानों को दी। प्रोजेक्ट प्रभारी डॉ. महावीर सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन तकनीक पर विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार फसल अवशेषों को मृदा मेें मिलाया जा सकता है। उन्होंने फसल अवशेष जलाने के नुकसानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धान की पुआल जलाने से जहां वातावरण में धुुएं का प्रकोप बढ़ जाता है। वहीं ओजोन परत पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि धान की पुआल को यूरिया डालकर भी सड़ाया जा सकता है। उन्होंने गन्ना पत्ती के प्रबंधन के टिप्स भी किसानों को दिए। डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. रीता आदि ने भी विचार रखे। सुधीर बिडवी, सतीश, धर्मवीर, राजषकुमार वशिष्ठ, जगदीश, ऋषिपाल, चेतन, राम सिंह, यशपाल आदि रहे।