देवबंद (सहारनपुर)। शियाओं के रोजा इफ्तार में सुन्नी के भाग न लेने वाले सपा के पूर्व जिला महासचिव सिकंदर अली ने सोशल मीडिया पर फतवे को फर्जी बताने वालों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने इसे सही बताया है।
चार दिन पूर्व सपा के पूर्व जिला महासचिव सिकंदर अली ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग के मुफ्तियों से सवाल किया था कि क्या शियाओं के यहां सुन्नी मुसलमान इफ्तार पार्टी या फिर शादी में शरीक होकर खाना पीना कर सकते हैं। जिस पर मुफ्तियों ने जवाब में सुन्नी मुसलमानों को इससे परहेज रखने की सलाह दी थी। सिकंदर अली ने फतवे की कॉपी मीडिया को उपलब्ध करा दी। न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों में फतवा सुर्खियों में आया तो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इसकी गूंज सुनाई देनी लगी। सोशल मीडिया पर फतवा लेने वाले सिकंदर अली ने सोशल मीडिया पर ही अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वो कोई मौलवी मुल्ला नहीं कि खुद फतवा तैयार कर लेंगे। यह फतवा उन्होंने दारुल उलूम से लिया है। उनका पक्ष जाने बिना ही कुछ लोग साजिश के तहत फतवे को फर्जी बताकर उन्हें झूठा साबित करने पर तुले हुए हैं। बता दें कि अभी तक इस मामले में दारुल उलूम का कोई भी जिम्मेदार न तो सामने आया और न ही किसी तरह का स्पष्टीकरण दिया है।
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फतवे में नहीं है जायज व नाजायज की जिक्र : मुफ्ती अहमद
फोटो संख्या 5
देवबंद। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद का कहना है कि दारुल उलूम ने शिया समुदाय को लेकर जो फतवा दिया है उसमें उन्होंने जायज और नाजायज का जिक्र न करके केवल इससे परहेज रहने की सलाह दी है। मुफ्तियों ने परहेज रखने की सलाह किसलिए दी है इसका खुलासा फतवे में नहीं किया गया है। मुफ्ती अहमद ने कहा कि फतवा गैर मुनासिब है नाजायज नहीं है।