फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माफी मांगने के बाद भी हुई कार्रवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। कासगंज घटना को लेकर डिप्टी डायरेक्टर (सांख्यिकी) रश्मि वरुण द्वारा फेसबुक पर की गई टिप्प्णी के बाद हुए हंगामे और उनके द्वारा माफी मांगने के बावजूद उन पर कार्रवाई हो गई। डिप्टी डायरेक्टर लखनऊ कार्यालय से संबद्ध किया गया। उन्होंने छह फरवरी को ही चार्ज छोड़ दिया था। कासगंज घटना को लेकर डिप्टी डायरेक्टर (सांख्यिकी) रश्मि वरुण ने 28 जनवरी को फेसबुक पर पोस्ट कर टिप्पणी की थी। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा हो गया था। उन पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा था। मगर, इससे पूर्व ही डिप्टी डायरेक्टर ने दोबारा पोस्ट कर माफी मांग ली थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने माफी मांगने के बावजूद डिप्टी डायरेक्टर को सहारनपुर से हटाकर लखनऊ मुख्यालय संबद्ध कर दिया। छह फरवरी को ही डिप्टी डायरेक्टर ने चार्ज छोड़ दिया था। डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण का कहना है कि वह अपनी पोस्ट के लिए माफी मांग चुकी हैं। स्थानांतरण होने पर मैने छह फरवरी को ही चार्ज छोड़ दिया था।
विज्ञापन

28 जनवरी की पोस्ट में डिप्टी डायरेक्टर ने लिखा था यह
-- तो यह थी कासगंज की तिरंगा रैली। यह कोई नई बात नहीं है। अंबेडकर जयंती पर सहारनपुर के सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी, जिसमें अंबेडकर गायब थे या कहिए भगवा रंग में विलीन हो गए थे। कासगंज में भी यही हुआ। तिरंगा तो शवासन में रहा, भगवा ध्वज शीर्ष आसन पर रहा, जो लड़का मारा गया, उसे किसी दूसरे समुदाय ने नहीं मारा, उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा, जो नहीं बताया जा रहा है कि अब्दुल हमीद की मूर्ति या तस्वीर पे तिरंगा फहराने की बजाए इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पर लाल रंग भारी पड़ गया।
माफी मांगते हुए भी कसा था तंज
-- 29 जनवरी को फेसबुक पर दोबारा पोस्ट कर डिप्टी डायरेक्टर ने माफी मांग ली थी। उन्होंने लिखा था कि जुनूं का दौर है किस-किस को समझाएं, उधर भी होश के दुश्मन, इधर भी दीवाने। कोई कह रहा है मशहूर होने के लिए लिखा है। कोई कह रहा है कि हिम्मत है तो गद्दारों के बारे में लिखो, लेकिन लिखना कोई हिम्मत या सियासत की बात नहीं है। बस एक बात थी, जो कुछ को पसंद आयी और कुछ को नापसंद रही। ख्वाहिश ये बेशक नहीं कि तारीफ हर कोई करे, मगर कोशिश ये जरूर कि बुरा न कोई कहे। सिर्फ छह लोगों ने लाइक या शेयर किया, मगर अखबार और चैनलों से बात ज्यादा वायरल हुई। मगर मेरा ऐसा कोई मकसद नहीं था कि किसी की भी भावनाएं आहत हों। जलने वालों की दुआओं से ही बरकत है, वरना अपना कहने वाले तो याद भी नहीं करते। इसलिए जिस किसी की भी भावनाएं आहत हुई हैं, उन सबसे मैं माफी मांगती हूं। मगर दोस्त बने रहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें