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Saharanpur News: शाकंभरी जयंती पर मां को अर्पित किए 56 भोग और 36 व्यंजन

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सिद्धपीठ के मुख्य द्वार पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। पश्चिमी यूपी के विख्यात सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में पोष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर माता का प्राकट्य पर्व धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। माता के भवन पर उमड़ा भक्तों का जन समूह जयघोष से माहौल को भक्तिमय बना रहा था। जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी संत भैरव तंत्राचार्य सहजानंद महाराज के सानिध्य में पूर्णाहुति के बाद संतों और श्रद्धालुओं ने माता को 56 भोग और 36 व्यंजन अर्पित किए।
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भगवती के मंदिर एवं शंकराचार्य आश्रम की भव्य सजावट की गई। मां जगदंबा के दरबार को फूलों और शाक सब्जी से विशेष रूप से सजाया गया। सिद्धपीठ में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। गत 30 दिसंबर से शंकराचार्य आश्रम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ का विधिवत समापन हुआ। पूर्णाहुति के बाद आश्रम व्यवस्थापक एवं अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत सहजानंद महाराज के सानिध्य में पिछले एक सप्ताह से आश्रम में तैयार किए जा रहे छप्पन भोग और 36 व्यंजन मां भगवती को अर्पण किये गए। संत समाज का सानिध्य एवं ढोल नगाड़ों की गूंज के बीच मां के जयघोष से पूरी शिवालिक तलहटी गूंज उठी। मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार की तरफ से मंदिर की भव्य सजावट की गई। माता का शृंगार अलग ही छटा बिखेर रहा था। मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार की ओर से पूर्व विधायक रानी देवलता, राणा आदित्य प्रताप सिंह, राणा सानिध्य प्रताप सिंह, कुंवर आतुल्य प्रताप सिंह द्वारा मां की विशेष पूजा अर्चना की गई। प्रदेश सरकार के संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास राज्यमंत्री जसवंत सैनी, भाजपा विधायक मुकेश चौधरी, पूर्व विधायक नरेश सैनी, दिनेश सेठी, युवा मोर्चा के बिजेंद्र सैनी, एसडीएम दीपक कुमार, सीओ मुनीश चंद्र, कोतवाली प्रभारी पीयूष दीक्षित रहे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने घंटों लाइन में लगकर माता के दर्शन किए।
मां के बिना नहीं है हमारा कोई अस्तित्व
शाकंभरी। जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने माता की महिमा का बखान करते हुए बताया कि मां की महिमा भी अनोखी है। मां के बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। शास्त्रों के अनुसार सबकी मां राजराजेश्वरी ही है यह कभी नवदुर्गा के रूप में तो कभी शताक्षी, भीमा के रूप में हमारी रक्षा करती है।
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शंकराचार्य ने बताया कि केवल अपनी आत्मशक्ति के द्वारा मां ने इस सारे संसार को उत्पन्न किया अर्थात संसार की उत्पादिता मां जगद्जननी हैं। उसी ने हमारी मां को उत्पन्न किया जिससे हम उत्पन्न हुए। इसलिए मां शाकंभरी जगद् जननी कहलाई। उन्होंने बताया की जब यह सृष्टि अस्तित्व में आई तब हमें ज्ञान की आवश्यकता हुई। पुराणों में भी उल्लेख है कि भगवान नारायण ने जब योगनिद्रा धारण कर ली तब उनकी नाभि से एक कमल की उत्पत्ति हुई। उस कमल के ऊपर ब्रह्माजी अभिभूत हुए। कमल की नाल के तंत्र में उन्होंने प्रवेश किया और चारों तरफ नजर घुमाई तो ब्रह्माजी चतुर्भुज कहलाए। तब ब्रह्माजी ने मां परांम्मभा की स्तुति की और उन्होंने ही उनको मार्ग दिखाया अर्थात मां की शक्ति से ही सब शक्तिमान है। इस अवसर पर ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी कमलेश्वरानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी सहजानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी तीर्थानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी सुदर्शन चक्र जी महाराज, ब्रहमचारी श्रवणानंद जी महाराज, ब्रह्मचारी रामानंद जी महाराज आदि रहे।

शंकराचार्य आश्रम में आयोजित शतचंडी महायज्ञ में शामिल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वनंद सरस्वती जी मह- फोटो : SAHARANPUR

द्धिपीठ स्थित माता के मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित मूर्तियां- फोटो : SAHARANPUR

मां के दरबार में 56 भोग एवं 36 व्यंजन ले जाते श्रद्धालु- फोटो : SAHARANPUR

शंकराचार्य आश्रम में जगदगुरु के प्रवचन सुनने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़- फोटो : SAHARANPUR

शंकराचार्य आश्रम में तैयार किए गए 56 भोग एवं 36 व्यंजन के साथ शंकराचार्य- फोटो : SAHARANPUR

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