सहारनपुर। राधा स्वामी सत्संग में लाखों अनुयायी पहुंचे हुए हैं। मुख्य मार्ग से लेकर सत्संग स्थल तक वाहनों का रेला है। पार्किंग भी फुल हो चुकी हैं, लेकिन इतनी भीड़ के बावजूद व्यवस्था सुदृढ़ बनी हुई है। क्योंकि राधा स्वामी सत्संग के सेवादार कदम कदम पर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं।
सरसावा क्षेत्र के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग में दो दिन से विशाल मेला लगा हुआ है। करीब 2200 बीघे में फैले सत्संग केंद्र पर व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए 12 गेट बनाए गए हैं, जहां से अनुयायी अपने वाहनों को लेकर सत्संग स्थल तक पहुंचते हैं। सत्संग स्थल के निकट ही वाहनों के आठ पार्किंग स्थल हैं। पार्किंग स्थल में दुपहिया वाहन से लेकर कार, बस, मिनी बस और मिनी ट्रक वगैरह खड़े किए गए हैं। पार्किंग स्थल में वाहन ले जाने से पहले पर्ची दी जाती है। खास बात यह है कि इस व्यवस्था को सेवादार पूरी शिद्दत से निभा रहे हैं। यातायात व्यवस्था संभालने वाले सेवादार निर्धारित वर्दी में हैं, जो सफेद शर्ट और नीली पैंट पहने हैं। रेडियम कलर वाली पट्टीदार जैकेट पहने हैं। बाहर मुख्य मार्ग पर पुलिस गश्त करती है, तो पंजाब पुलिस की टीम भी लगी हुई है। सहारनपुर से पिलखनी पहुंचने और हरियाणा की तरफ से पिलखनी सत्संग केंद्र तक मार्ग पर जितने भी कट हैं, वहां पर दो-दो सेवादार की ड्यूटी लगाई गई है। सत्संग में यूपी, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों के अलावा नेपाल के अनुयायी भी पहुंचे हैं।
300 बीघे में फैला है पंडाल
राधा स्वामी ब्यास डेरा के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह महाराज का प्रवचन स्थल पंडाल में बनाया गया है। पंडाल भी करीब 300 बीघे से ज्यादा में फैला हुआ है, जिसे तैयार करने में कई महीने लग गए। पंडाल में अनुयायियों के बैठने के लिए फर्श बिछाए गए हैं, तो कतारबद्ध बैठने की व्यवस्था है। बीच में इंटरलॉकिंग टाइल्स से मार्ग बनाया गया है, जिस पर डेरा प्रमुख बाबा खुली जीप से अनुयायियों के बीच घूमकर दर्शन देते हैं। सत्संग स्थल में जहां बाबा गुरिंदर सिंह विराजमान होते हैं, वहां सोफा लगाया गया है। उसके आगे छोटी सी जाली से बाउंड्री बनाई गई है, जिसके आगे अनुयायियों के बैठने की व्यवस्था है।
वॉकी टॉकी से करते हैं संपर्क
पंडाल के भीतर और सत्संग स्थल के गेट से लेकर मुख्य मार्ग, पार्किंग आदि स्थानों पर सेवा में जुटे सेवादार वॉकी टॉकी लिए हुए हैं। उसी के जरिये एक दूसरे से संपर्क किया जाता है। सत्संग स्थल के प्रवेश द्वार पर ही पूछताछ केंद्र, मोबाइल और इलेक्ट्रानिक उपकरण जमा करने के काउंटर बनाए गए हैं। मोबाइल फोन अथवा कैमरा सत्संग स्थल तक ले जाना प्रतिबंधित किया हुआ है। पंडाल परिसर में 100 से ज्यादा सीसीटीवी लगाए गए हैं, जिसके कंट्रोल रूम से निगरानी की जा रही है। उधर, सत्संग पंडाल के पीछे ही लंगर की व्यवस्था है, जिसमें एक बार में ही 50 हजार से ज्यादा अनुयायी एक साथ लंगर में प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। पंडाल परिसर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिसे सेवादार ही करते हैं। सेवादारों को पहचानपत्र जारी किए गए हैं, जिसे प्रत्येक सेवादार अपने गले में डालकर रखता है। इसके अलावा करीब 10 बीघे में अनुयायियों के सामान रखने के स्टैंड बनाए गए हैं।