गंगोह/चिलकाना (सहारनपुर)। मोहर्रम की आठवीं तारीख को भी सोगवारों ने रस्मों रिवायत के मुताबिक मजलिस के बाद अलम के साथ मातमी जुलूस निकाले। मरसिया ख्वानी एवं नोहा ख्वानी भी की गई।
मोहल्ला सैयदान एवं मखदूमजहां स्थित इमाम बारगाहों में मौलानाओं ने करबला का वाक्या पेश वहां मौजूद लोगों को अश्क बार कर दिया। आह-हो-जारी के बीच इमाम बारगाहे या अली के नारों से गूंज उठी। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना नकवी हैदर ने कहा कि सरकार मोहम्मद साहब के लबों से निकली हर बात इस्लाम है। जिसने मोहम्मद साहब की फरमा बरदारी की उसने समझो इस्लाम को कबूल कर लिया और अगर किसी ने उनकी किसी भी बात पर जरा भी शक किया तो वह इस्लाम से खारिज हो गया। मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलकर इस्लाम की खातिर हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार सहित सभी साथियों को कुर्बान कर दिया। मौलाना नकवी हैदर, मो. शाकिर नाजा, आमिर अब्बास, गाजी अब्बास, बिलाल हैदर, आगाज जैदी, इंतजार मिर्जा, मोनिस रिजवी, अथर अब्बास, राशिद एजाज, नाज रहबर, हाशिम हुसैन, राशिद हुसैन आदि रहे।
चिलकाना में मोहर्रम की आठ तारीख को एक मजलिस को खिताब करते हुए शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मेहवर अब्बास नकवी ने कहा कि करबला की जंग लड कर हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम ही नहीं पूरी दुनिया को सबक दिया कि मोहर्रम की सात तारीख के बाद यजीद की सैना ने इमाम हुसैन के खेमे का पानी भी बन्द कर दिया परन्तू उन्होंने दुश्मनों से हार नहीं मानी। इमाम हुसैन भूखे प्यासे दुश्मन की सैना के सामने अपने चन्द लोगों के साथ लडते रहे लेकिन दुश्मन की सेना के सामने नहीं झुके। मजलिश के दौरान जनबा अब्बास की शहादत का किस्सा बयान किया गया, जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद हर श्रोता फूट-फूटकर रोने लगा। मजलिस के दौरान नोहा ख्वानी पूर्व चेयरमैन इस्माईल हुसैन त्रिमीजी, नायाब हुसैन, रिफाकत हुसैन तथा मरसिया ख्वानी कमर अब्बास तथा समर अब्बास ने की। मजलिस में जाफर इमाम, मूसा इमाम, जायर हुसैन चांद, मुसर्रत हुसैन, हैदर अली, तनवीर हैदर आदि थे।