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उतराखंड हाईकोर्ट का फतवों पर बैन लगाने का मामला...

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उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी जमीयत : मदनी
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देवबंद(सहारनपुर)। जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा फतवा पर लगाए गए प्रतिबंध को संविधान के मौलिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बताया है। मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद इस पर चुप नहीं रहेगी और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।
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शनिवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कहा कि फतवा किसी को मजबूर नहीं करता है, बल्कि वे पूछने वाले के जवाब में एक दीनी रहनुमाई है। इस तरह से इसे मानवता और कानून के खिलाफ हरगिज नहीं कहा जा सकता। मदनी ने आश्चर्य जताया कि न्यायाधीश ने केवल एक दिन के अंदर एक वकील द्वारा प्रस्तुत समाचार पत्र की प्रस्तुति के आधार पर फैसला कर दिया और घटना के लिए किसी भी जांच की आवश्यकता महसूस नहीं की। जबकि सच यह है कि घटना का फतवा के साथ कोई संबंध ही नहीं है। प्रासंगिक समाचार पत्र में यह लिखा है कि यह पंचायत का निर्णय था, वहां किसी मुफ्ती और आलिम का नाम भी नहीं है। मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद मुस्लिम अल्पसंख्यक के धार्मिक अधिकारों और पहचान के लिए हर संभव संघर्ष जारी रखेगी और इस संबंध में वकीलों से सलाह करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरी ताकत से अपना पक्ष पेश करेगी।
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