महिलाओं को अधिकारों के प्रति जागरूक किया
सहारनपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में परचम संस्था की ओर से आयोजित गोष्ठी में महिलाओं के अधिकारों और उनके प्रयोग को लेकर मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकतर महिलाएं अब भी संवैधानिक अधिकारों से महरूम हैं।
गोष्ठी में नीना धींगड़ा ने कहा कि संविधान ने महिलाओं को पुरुषों के बराबरी का हक दिया है। मगर अफसोस इस बात का है कि संविधान लागू होने के सातवें दशक में भी महिलाएं अपने संवैधानिक हक के लिए जूझ रही हैं। डॉ. सपना ने कहा कि न्याय के लिए आज भी महिलाओं को भटकना पड़ता है। अजय कुंदन ने कहा कि लिंग भेद के कारण बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है जो महापाप है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के अब तक अटके रहने पर चिंता जताई।
दलजीत सिंह कोचर ने महिलाओं के लिए संविधान में प्रदत्त कई महत्वपूर्ण अधिकारों की जानकारी दी। गोष्ठी की संयोजक डॉ. कुदसिया अंजुम ने कहा कि यदि महिलाओं को अपने अधिकार चाहिएं तो उन्हें शिक्षा को अपना हथियार बनाना होगा। कार्यक्रम में मनुषी, गीता, चंदा कोचर, अलीशा, आकांक्षा, जैनब, लाएबा, शमीम, वीपी पोपली, शहला आदि मौजूद रहीं।
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