सहारनपुर। केंद्र सरकार के कार्यकाल के आखिरी पूर्णकालिक बजट में भी सहारनपुर के हाथ खाली रह गए। बजट ने तो जैसे की सहारनपुर की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नई ट्रेन की घोषणा की जानी तो दूर की बात, कई राज्यों को जोड़ने वाले सहारनपुर रेलवे स्टेशन के विकास के लिए भी कोई नई घोषणा नहीं की गई।
केंद्र सरकार ने रेलवे स्टेशनों पर सिर्फ स्वचालित सीढ़ियां लगवाए जाने की घोषणा की है। जबकि सहारनपुर में यह कार्य पहले से ही चल रहा है। सहारनपुर का रेलवे स्टेशन वाई-फाई पहले से ही है। ऐसे में रेल बजट में की गई ये दोनों घोषणाएं बेमानी हैं। सहारनपुर में ट्रेनों की संख्या काफी कम है। सहारनपुर से दिल्ली की ओर जाने वाली सुबह सवा 9 बजे के बाद रात 12 बजे तक देहरादून एक्सप्रेस को छोड़कर कोई एक्सप्रेस ट्रेन ही नहीं है। सवा 9 बजे के बाद सीधे शाम 4 बजे और फिर रात 12 बजे तक कोई ट्रेन नहीं। जबकि सहारनपुर से शामली, बागपत, दिल्ली रेलमार्ग पर सिर्फ 7 ट्रेनें हैं, जिनमें से 6 ट्रेनें पैसेंजर हैं, सिर्फ एक एक्सप्रेस है। वह भी पैसेंजर बनकर ही चल रही है। दिल्ली, गाजियाबाद जाने वाले दैनिक यात्री काफी समय से इन दोनों रूटों पर ट्रेनें बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे। लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। न ही सहारनपुर के लिए नई रेलवे लाइन की घोषणा हुई और न ही रेलवे स्टेशन के विकास और विस्तार के बारे में ही कोई घोषणा की गई। जबकि सहारनपुर में प्लेटफार्मों की कमी के चलते ट्रेनों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
दैनिक रेल यात्री भजन सिंह का कहते हैं कि सहारनपुर की सरकार ने उपेक्षा की है। यहां एक दो नहीं बल्कि कई सालों से नई ट्रेनें चलाए जाने की मांग की जा रही है। अधिकारियों, मंत्रियों सभी को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्री मयंक का कहना है कि उन्हें दिल्ली जाना था। लेकिन कोई ट्रेन ही नहीं है। एक ट्रेन पैसेंजर थी, वह भी देरी से पहुंची। अब वह बस से ही दिल्ली जाने के लिए बस स्टैंड जा रहे हैं।
यात्री शमीम का कहना है कि जो ट्रेनें चल रहीं हैं, वे ही समय से नहीं चल पा रहीं हैं। यात्री घंटों इंतजार करते रहते हैं। सुबह की ट्रेनें शाम को पहुंच रही हैं।