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हमारे घर में तो बेटी का भी होना जरूरी है

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हमारे घर में तो बेटी का भी होना जरूरी है
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बेहट (सहारनपुर)। बाबा दीदार शाह के मुबारक उर्स पर मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। मुशायरे का आगाज नात ए पाक से किया गया।
शायर यासीन कामिल ने पढ़ा सारा जीवन काट दिया खुद्दारी का एहसास लिए, दरिया दरिया गुजरा हूं मैं करबो बला की प्यास लिए। मजाहिया शायर बिलाल सहारनपुरी ने पढ़ा जो तरक्की गांव की कर ना सके ऐसे प्रधानों पर झाडू फेर दे। डॉक्टर साबिर बेहटवी ने पढ़ा हुई बीमार जब बीवी तड़प कर ये कहा दिल ने, हमारे घर में तो बेटी का भी होना जरूरी है। खुर्रम सुल्तान ने पढ़ा तुम हो, के लिए बैठे हो बरसों के हंसी ख्वाब, मैं हूं कि भरोसा ही नहीं है मुझे पल का। मजाहिया शायर अमजद अजीम ने पढ़ा अगर तुम छत पर आ जाओ तुम्हारी दीद हो जाए, हमारी क्या मोहल्ले में सभी की ईद हो जाए।
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शादाब नियाजी ने पढ़ा लबों को सी लिया पर हाल-ए-दिल की, मेरे आंसू विजाहत कर रहे हैं। शाह जफर ने पढ़ा दूर से देख के बेताब हुआ जाता हूं, होगा नजदीक से दीदार तो क्या-क्या होगा। नदीम अनवर ने पढ़ा जिंदगी का यूं मेरी इख्ताम हो या रब, मेरा सर हो सजदे में और दम निकल जाए। वहाब नूर ने पढ़ा मैं क्या गम के अखाड़े का अकेला ही खिलाड़ी हूं, मुझे ही आजमाता है कभी कोई कभी कोई। इनके अलावा भी अन्य शायरों ने अपने बेहतरीन पेशकश से खूब तालियां बटोरी। मुशायरे की सदारत यासीन कामिल धानवी एवं निजामत खुर्रम जमाल ने की। इस मौके पर उमर अली खान, राव नौशाद, प्रधान राव अमानुल्ला, राव अय्याज, राव मुजम्मिल, मास्टर जुनेद, राव अफजाल, मुंशी नौशाद, राव इरशाद, जमशेद, अब्दुल मालिक, सुफियान, गुड्डू प्रधान आदि की मौजूदगी रही।
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