मस्जिद की जगह अल्लाह की मिल्कियत : उलमा
देवबंद(सहारनपुर)। बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद में शिया वक्फ बोर्ड द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमीन पर अपना दावा पेश करने के मसले पर देवबंदी उलमा का कहना है कि जिस जगह एक बार मस्जिद बन गई उस पर किसी का हक नहीं रहता। बल्कि वो अल्लाह की मिल्कियत हो जाती है।
मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। जिस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलमा-ए-हिंद समेत अन्य मुस्लिम संगठन स्पष्ट कर चुके हैं कि इस मसले में कोर्ट जो फैसला सुनाएगी वो उन्हें स्वीकार होगा, लेकिन उसके बावजूद कुछ लोग अदालत और देशवासियों को गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं। 72 वर्ष पूर्व यह तय हो चुका था कि जमीन का मालिक सुन्नी वक्फ बोर्ड है। शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में जो दावा पेश किया है वो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि तमाम मुसलमान यह चाहता है कि मुल्क में अमन, शांति और आपसी भाईचारा कायम रहे, लेकिन कुछ स्वार्थी किस्म के लोग अपने स्वार्थ की खातिर मुल्क को नफरत की आग में झोंकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट जब जो फैसला देगा उसका इंतजार करना चाहिए। वहां मालिकाना हक किसका है यह सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा।