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न्यूनतम तापमान बढ़ने से नहीं मिल रही गर्मी से राहत

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सहारनपुर। चिलचिलाती धूप के साथ मौसम में बन रही उमस से लोग पसीना-पसीना है। इससे भी अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि न्यूनतम तापमान लगातार ऊपर की ओर जा रहा है, जिसकी वजह से लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। दिन के साथ ही रात में भी गर्मी का सितम लोगों के पसीने छुड़ा रहा है।
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पिछले करीब 15 दिन से तापमान लगातार बढ़ रहा है। सोमवार यानी 21 मई का दिन इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा था, जिसमें अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था। मगर न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस ही था। 21 मई के बाद अधिकतम तापमान में तो गिरावट दर्ज की गई है, मगर न्यूनतम तापमान लगातार बढ़ा है। बुधवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री रहा तो न्यूनतम तापमान बढ़कर 27 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। न्यूनतम तापमान के बढ़ने की वजह से लोगों को गर्मी से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। गर्मी के साथ साथ मौसम में उमस भी बनी रही। गर्मी से बचने के लिए महिलाएं मुंह और सिर को कपड़े से लपेटकर चल रही हैं। दोपहर के समय बाजारों में ग्राहक कम पहुंच रहे हैं।

गर्मी के साथ बढ़ा हीट स्ट्रॉक का खतरा, सावधानी बरतें
सहारनपुर। जिस कदर गर्मी पड़ रही है। उससे हीट स्ट्रॉक का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों की मानें तो ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही इंसान को मौत की ओर धकेल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि गर्मी से बचने के लिए लोग सावधानियां बरतें। साथ ही परेशानी होने पर तुरंत नजदीकी और अच्छे चिकित्सक से संपर्क करें।
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वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि गर्मी में ज्यादातर बीमारियों के होने या बढ़ने की वजह हम खुद होते हैं। यदि हम कुछ सावधानियां बरतें तो हीट स्ट्रॉक जैसे खतरों को टाला जा सकता है। इसमें व्यक्ति को ज्यादा कुछ नहीं करना होता। केवल लिक्विड अधिक से अधिक लेना होता है, जिसमें नींबू पानी, शिकंजी, ताजा और शुद्ध पानी तथा ओआरएस का घोल शामिल हैं। नियमित रूप से इन चीजों का सेवन कर हम धूप में काम करते हुए भी खुद को बचा सकते हैं।
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हीट स्ट्रॉक के लक्षण
- शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना और दौरे पड़ना।
- गफलत में मरीज का उल्टा-सीधा बोलना और ब्लड प्रेशर का नीचे चला जाना।
- चौथी और पांचवीं स्टेज में मरीज का कोमा में चले जाना।
- कई मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होना।
इन लोगों को अधिक खतरा
- हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों को।
- शुगर, किडनी और सांस के मरीजों को।
- मजदूरों और खेतों में काम करने वालों को।
- ईंट भट्टों और फील्ड में अधिक देर तक काम करने वालों को।
हीट स्ट्रॉक के खतरें से ऐसे बचें
- लगातार फील्ड में काम करने वाले हर घंटे में एक लीटर नींबू पानी, शिकंजी, ओआरएस का घोल या पानी पीयें।
- ऑफिस और फील्ड में समान रूप से काम करने वाले हर घंटे आधा लीटर लिक्विड लें।
- सुविधाजनक ऑफिस में काम करने वाले प्रत्येक घंटे ढाई सौ मिली लीटर लिक्विड लें।
- गांव देहात में हीट स्ट्रॉक आने पर मरीज के शरीर पर तापमान 101 डिग्री पहुंचने पर ठंडी पट्टी बांधें।
- ऐसे रोगियों को हर आधे घंटे में एक लीटर लिक्विड दें।
- यदि मरीज को लिक्विड देना मुमकिन न हो तो साधारण ग्लूकोज चढ़वाएं।
- गर्मियों में सफर के दौरान काला चश्मा, हेलमेट, सिर पर कपड़े आदि का इस्तेमाल करें।
- ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
- फील्ड में चक्कर आने पर रोगी के पैरों की दिशा ऊपर की ओर कर दें, जिससे गर्मी दिमाग में न चढ़े।
- हालत में सुधार न होने पर किसी अच्छे चिकित्सक के पास जाएं।
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