सहारनपुर। दिन में अधिक और रात को कम तापमान के चलते आम के बागों में हॉपर कीट और एंथ्रेक्नोज रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यह कीट और रोग आम के बौर को बहुत नुकसान पहुुंचाते हैं। इन पर समय से नियंत्रण नहीं होने से आम के बौर में फल नहीं बन पाते।
कृषि विज्ञान केंद्र में फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा को बागों के भ्रमण के दौरान इन रोगों और कीट के प्रकोप का पता चला। उन्होंने बताया कि हॉपर कीट का वयस्क और शिशु कोमल शाखाओं, पत्तियों और पुष्प क्रमों से रस चूसते हैं। इसके चलते प्रभावित बौर सूख जाता है। इसकी कीट द्वारा मधु जैसा पदार्थ भी निकाला जाता है। जिसमें काली फफूंद यानि सूटी मोल्ड पैदा हो जाती है। इसके नियंत्रण के लिए क्लिक या थायामियाक्सम की एक किलो मात्रा या मोना क्रोटोफास की 3 लीटर मात्रा को 2000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। जबकि एंथ्रेक्नोज से बचाव के लिए हैक्साकोनाजॉल प्लस, जीनेब की 3 किलोग्राम मात्रा को 2000 लीटर पानी में घोलकर स्प्रै करना फायदेमंद रहता है। उन्होंने बताया कि छिड़काव को हमेशा दोपहर बाद ही करनी चाहिए। इसमें पेड़ के तने और ऊपरी हिस्से पर अच्छी तरह छिड़काव करना चाहिए।