देवबंद (सहारनपुर)। नेशनल एजूकेशन पॉलिसी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) को लेकर विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे और इसका फायदा मदारिस-ए-इस्लामिया को पहुंचेगा।
मंगलवार को खास बातचीत में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि नई एजूकेशन पॉलिसी में मदारिस-ए-इस्लामिया की दस्तूरी आजादी बाकी रहे और असरी उलूम (स्कूलों) में भी अल्पसंख्यक तबके को तालीम दिए जाने का मौका हासिल हो इसकी सिफारिश पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक इदारों को भी अपनी दस्तूरी आजादी के साथ बढ़ावा दिए जाने का मौका दिया जाए। मौलाना बनारसी ने केंद्र सरकार के तीन तलाक पर तीन साल की सजा वाले बिल का नाम लिए बगैर कहा कि दूसरे दीनी मामलात में भी उलमा की राय शामिल की जाए तो किसी भी प्रकार का कोई विवाद खड़ा न हो। वहीं, दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली की ओर से जारी बयान में बताया गया कि दारुल उलूम की नुमाइंदगी के लिए मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना मोहम्मद मुफ्ती इस्माईल मालेगांव को चुना गया है। उम्मीद है कि वह मदरसों के निजाम को लेकर नेशनल एजूकेशन पॉलिसी की मीटिंग में अपनी बात को सही ढंग से रखेंगे और इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। बता दें कि केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय ने हाल में ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ड्राफ्ट के लिए एक समिति बनाई है। जिसमें दारुल उलूम समेत दूसरे दीनी इदारों को अपना रुख रखने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह कमेटी मदरसों के जिम्मेदारों की सिफारिशों को लेकर आगामी 31 मार्च को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी।