सहारनपुर। बारिश के बाद जर्जर मकानों में रह रहे सैकड़ों लोग दहशत में हैं। देवबंद में जर्जर मकान के ढहने से तीन लोगों की मौत के बाद भी जर्जर मकानों को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम का रवैया बेहद लापरवाह है। शहर के भीतर 200 से अधिक पुराने और जर्जर मकान हैं, जिनमें रह रहे परिवारों की जिंदगी चौबीसों घंटे खतरे में है। कई साल से लगातार जर्जर भवन गिरते रहे हैं, जिनमें दबने से कई लोग अभी तक अपनी जान गवा चुके हैं। करीब दो साल पहले शहर में कई जर्जर मकानों के ढहने के बाद नगर निगम ने सर्वे कराया, मगर इन मौत की इमारतों पर कार्रवाई की बजाय सर्वे को ही फाइलों में दबा दिया गया। अब एक बार फिर जर्जर मकानों की वजह से हादसों का डर बना हुआ है।
पुराने और जर्जर होने की वजह से यह भवन लगातार गिर रहे हैं। दो साल पहले हिरनमारान में ऐसा ही पुराना भवन गिरने से नीचे गोदाम में काम कर रहे मजदूर दब गए थे। करीब तीन साल पहले नगर कोतवाली क्षेत्र में भारी बारिश के बीच परिवार मकान खाली कर रहा था। इसमें मां और बेटे की दबकर मौत हो गई थी। लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए नगर निगम ने जर्जर मकानों को ध्वस्त कराने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जर्जर भवनों में जमे हुए हैं। सहारनपुर ऐतिहासिक शहर है, जिसमें मुगलों और अंग्रेजों के जमाने के सैकड़ों भवन आज भी मौजूद हैं। पुराने शहर में हर दस कदम पर सौ से अधिक वर्ष पुराने भवन मिल जाएंगे। इसके लिए जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, जिनकी संख्या करीब 160 थी। मगर भवनों को चिह्नित करने से आगे नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। आलम यह है कि आज भी सौ से अधिक परिवार इन जर्जर भवनों में रह रहे हैं। पुराने शहर में अनेक जर्जर मकान हैं। इनमें कुछ मकान तीन से चार मंजिला तक हैं, जिनकी वजह से पड़ोसियों और उनके मकानों को भी खतरा बना हुआ है। ऐसे लोग हर साल नगर निगम और डीएम को ज्ञापन देकर अपनी जान की सुरक्षा की मांग कर चुके हैं।
हादसों के बावजूद नहीं छोड़ रहे जर्जर मकान
सबसे ज्यादा पुराने और जर्जर मकान पुराने शहर में हैं। ज्यादातर इमारतों पर विवाद के चलते हादसों के डर के बावजूद कब्जेदार वहां से हटने को तैयार नहीं है। पिछले दो साल में शहर में करीब पांच से ज्यादा मकान गिरने से कई मौतें हो चुकी हैं। बावजूद इसके जर्जर मकानों को छोड़ने के लिए उसमें रहने वाले तैयार नहीं हैं।
शहर में जर्जर मकानों का मामला मेरे संज्ञान में है। जिन भवनों के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, उन्हें छोड़कर बाकी मकान स्वामियों को नोटिस भेजकर अपने मकान ध्वस्त करने को कहा जाएगा। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
- गौरव वर्मा, नगरायुक्त