गबन की आरोपी खानपुर की प्रधान बहाल
- हाईकोर्ट ने निलंबन प्रक्रिया को अवैध करार दिया
गंगोह (सहारनपुर)। शौचालयों के लिए आए सरकारी धन के गबन के आरोप में निलंबित की गई गांव खानपुर गुर्जर की महिला ग्राम प्रधान शाहिदा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया है। बहाली पर खुशी का इजहार करते हुए उसके समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं।
बता दें कि लोहिया गांव खानपुर गुर्जर में बनाए गए शौचालयों की जांच के दौरान तत्कालीन सीडीओ दीपक मीणा ने ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को सरकारी धन के गबन का दोषी पाया था। इसके बाद महिला ग्राम प्रधान शाहिदा और ग्राम सचिव को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई थी। इसके खिलाफ ग्राम प्रधान शाहिदा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए 17 मई 2017 को जारी जिलाधिकारी के आदेश को निरस्त करने की अपील की। अपने प्रत्यावेदन में प्रधान ने कोर्ट को बताया कि राजनीतिक दबाव में मुख्य विकास अधिकारी सहारनपुर और सहायक अभियंता लघु सिंचाई ने जांच की कार्यवाही की थी। आरोप है कि इन लोगों ने मात्र आधा घंटे के भीतर ही 666 शौचालयों की जांच दर्शाकर लाखों के गबन का आरोप लगा दिया था।
प्रत्यावेदन में कुछ लोगों पर अवैध वसूली का दबाव डालने और ना देने पर झूठी शिकायतें करने की बात भी कही गई। इसके बाद हाईकोर्ट के न्यायधीश अमित सतलाकर ने डीएम से वास्तविक दस्तावेज तलब कर लिए थे। इसके जवाब में डीपीआरओ के मुख्य लिपिक राकेश कुमार ने दस्तावेजों सहित कोर्ट में प्रशासन का पक्ष रखा। प्रशासन का पक्ष सुनने के बाद तमाम प्रक्रिया को निरस्त करते हुए न्यायाधीश ने प्रधान शाहिदा के निलंबन की प्रक्रिया को असंवैधानिक करार देते हुए प्रधान को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया है।