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एक साल में भी हिंसा के दंश से नहीं उभर पाया सहारनपुर

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एक साल बाद भी हिंसा का दंश झेल रहा है जिला
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सहारनपुर। दलित और राजपूत समाज के विवाद को लेकर सहारनपुर में नौ मई को हुई हिंसा से लोग अभी तक उबर नहीं पाए हैं। जातीय संघर्ष की आग में झुलसे सहारनपुर ने न केवल अपना मान खोया, बल्कि जातीय संघर्ष को जन्म देने का कलंक भी लगा लिया। जिले को आज भी जातीय आग से बने गहरे जख्मों पर भाईचारा और सद्भाव के मरहम की जरूरत है।
जिले को नौ मई 2017 की घटना ने इतने गहरे जख्म दिए हैं, जो एक साल बाद भी नहीं भर पाए हैं। महाराणा प्रताप जयंती के दिन शब्बीरपुर कांड के विरोध में दलित समाज के लोगों ने रामनगर में हिंसात्मक प्रदर्शन किया। यह हिंसा इतनी बढ़ी कि प्रशासनिक ही नहीं पुलिस अधिकारियों को भी अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था। एक साल बीतने के बावजूद घटना के जख्म अभी भी हरे हैं। ग्राम रामनगर, मल्हीपुर, शब्बीरपुर, अंबेहटा चांद, बड़गांव में आज भी तलवारें खिंची हुई हैं। पहले जैसा सद्भाव बनना तो दूर, अब एक दूसरे के मोहल्लों से गुजरने से भी लोग कतराने लगे हैं। छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में तलवारें खिंच जाना रोजमर्रा की बात हो गई है। इस मामले में अभी तक राजनीति ही की गई, इस जातीय सद्भाव की खाई को पाटने का किसी ने भी कदम नहीं उठाया।
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--। नौ मई को जल उठा था सहारनपुर
शब्बीरपुर में पांच मई को हुए जातीय संघर्ष के विरोध में भीम आर्मी दलितों को एकत्रित कर प्रदर्शन करने के लिए पहुंची थी, जबकि पुलिस प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया तो जिले भर से भीम आर्मी एवं दलित समाज के लोगों ने सहारनपुर शहर के सभी रास्तों को बंद कर हिंसक प्रदर्शन किया। 12 बाइकें, कार को क्षतिग्रस्त कर दिया, एक बस में आग लगा दी गई थी। सिर्फ सहारनपुर ही नहीं सरसावा, रामपुर मनिहारान, बड़गांव में भी हिंसक प्रदर्शन हुए थे।
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--। भीम आर्मी आई सुर्खियों में
सहारनपुर हिंसा के बाद भीम आर्मी अचानक सुर्खियों में आ गई। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन, राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल, जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया समेत दो दर्जन पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। चारों मुख्य पदाधिकारियों पर फरार होने के चलते 12-12 हजार का इनाम घोषित किया गया।
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--। चंद्रशेखर पर लगाई गई रासुका
सहारनपुर हिंसा में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण समेत अन्य सभी पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया। रावण को छह जून 2017 को पुलिस ने डलहौजी से गिरफ्तार किया। जिस पर 3 नवंबर को रासुका लगा दी गई। दो पदाधिकारियों ने कोर्ट में सरेंडर किया। सहारनपुर हिंसा में देहात कोतवाली एवं अन्य थाने में 32 एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिनमें अब तक 118 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा लगभग 1200 अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग-अलग थाने में एफआईआर दर्ज कराई गईं थीं।
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--। धर्म परिवर्तन कर दबाव में लाने का किया प्रयास
सहारनपुर हिंसा के बाद दलितों ने पुलिस एवं प्रशासन पर आरोपियों को गिरफ्तार न किए जाने, शब्बीरपुर कांड के दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग करते हुए दो बार बड़ी नहर पर पहुंचकर देवी-देवताओं के चित्रों को प्रवाहित किया और बौद्ध धर्म अपनाने का एलान कर दिया।
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-। देश भर में छिड़ी एक नई बहस
शब्बीरपुर की घटना के बाद हुई सहारनपुर हिंसा के चलते देश भर में जातिवाद को लेकर एक नई बहस छिड़ गई। दलितों और राजपूत बिरादरी के जनप्रतिनिधियों द्वारा अलग-अलग तर्क दिए जाने लगे। टीवी चैनलों पर डिबेट शुरू हो गई। दूसरे राज्यों के राजनीति से जुड़े लोगों ने इस मुद्दे को हवा दी। अब इस मुद्दे पर जमकर राजनीति हो रही है। राजपूत समाज से जुड़े नेता और दलित नेता आमने-सामने आ चुके हैं।
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