सहारनपुर। निजीकरण के विरोध में विद्युत निगम के कर्मचारियों की हड़ताल ने राजस्व वसूली को करारा झटका दिया है। 23 मार्च से शुरू हुई हड़तालसे पूरे सहारनपुर मंडल में लगभग दस करोड़ की वसूली घट गई है। जबकि लक्ष्य के सापेक्ष 40 प्रतिशत से भी कम राजस्व वसूली हो सकी। जबकि वसूली के मात्र तीन दिन शेष रह गए।
विद्युत निगम के कर्मचारियों द्वारा निजीकरण के विरोध में 23 मार्च से हड़ताल शुरू की है। पहले तो आंशिक हड़ताल की गई। लेकिन 27 मार्च को ताला बंद कर हड़ताल की गई। बुधवार से फिर अपराह्न 3 बजे से हड़ताल शुरू कर दी गई।
हड़ताल ने राजस्व वसूली को करारा झटका दिया है। सहारनपुर मंडल के तीनों जिलों में लगभग 200 करोड़ रुपये का बकाया वसूली का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें सहारनपुर जिले का लगभग 55 करोड़ रुपये का बकाया वसूली का लक्ष्य रखा गया। बकाया वसूली के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अधिकारियों ने पूरा जोर लगा दिया। शिविरों का आयोजन किया गया। इसी दौरान निगम के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू किए जाने के विरोध में निगम कर्मचारियों ने वसूली छोड़ हड़ताल शुरू कर दी। जिससे विद्युत निगम की बकाया वसूली घटती चली गई। छह दिन में ही पूरे मंडल में लगभग 10 करोड़ रुपये का झटका लग गया है। प्रतिदिन लगभग चार करोड़ रुपये की वसूली सहारनपुर मंडल में की जा रही थी। सहारनपुर में लगभग एक से डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिदिन की वसूली की जा रही थी। लेकिन हड़ताल ने बकाया वसूली की प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया।
अब तक तीनों जिलों की बकाया वसूली मात्र 39 प्रतिशत ही हो सकी है। सहारनपुर में तीनों विद्युत खंडों में शहरी क्षेत्र में 35 प्रतिशत, देहात के प्रथम खंड में 42 प्रतिशत और दूसरे खंड में 45 प्रतिशत ही वसूली हो सकी है।
वसूली का प्रयास तेज किया जा रहा है
हड़ताल ने पूरे मंडल में ही बकाया वसूली को प्रभावित किया है। सहारनपुर में वसूली प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष अधिक से अधिक वसूली की जाएगी।
रविंद्र गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सहारनपुर नगर