सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना में चयन के बाद नगर निगम ने शहर में चल रही डेयरियों को शहर से बाहर करने का निर्णय लिया है। इतना ही नहीं, अन्य पशुओं के पालन का काम भी शहर से बाहर ही होगा। इसके लिए नगर निगम ने ठोस कार्ययोजना तैयार की है, जिस पर शीघ्र ही काम शुरू होगा।
नगर निगम ने करीब तीन वर्ष पहले सड़कों पर चलने वाली डेयरियों का सर्वे कराया था। 70 से अधिक डेयरियां ऐसी पाई गई थी, जो पूरी तरह सड़कों पर थीं। यानी भैंस और गायों को सड़कों पर बांधा जा रहा था। चकराता रोड पर महाराज सिंह कॉलेज चौक से बीडी बाजोरिया इंटर कॉलेज तक सड़कों के दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में पशुओं को बांधा जाता है। इसकी वजह से सड़क संकरी हो रही है, जिसपर दिन भर जाम की स्थिति रहती है। साथ ही पशुओं के सड़क पर बंधने की वजह से यहां दिन भर गंदगी रहती हैं, जिससे निकलने वाली दुर्गंध लोगों को परेशान करती है। कोतवाली मंडी क्षेत्र में भी अनेक डेयरियां सड़क पर ही चल रही हैं। इससे भी बड़ी समस्या तब बनती है, जब डेयरी संचालक बड़ी संख्या में भैंसों को सड़क पर लाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। इसकी वजह से एक ओर जहां यातायात प्रभावित होता है, वहीं सड़क पर हादसे होने का भी खतरा बढ़ जाता है। अब नगर निगम ने शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए डेयरियों को शहर से बाहर करने का निर्णय लिया है। केवल सड़कों पर ही चलने वाली डेयरियों को बाहर नहीं किया जाएगा, बल्कि शहरी क्षेत्र में किसी भी जगह पर चलने वाली डेयरियां बाहर होंगी। इसके अलावा अन्य प्रकार के पशुओं का पालन भी शहर से बाहर होगा।
सड़कों पर विचरण नहीं कर सकेंगे पशु
सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश हैं कि पशुओं को सड़कों पर विचरण नहीं करने दिया जाए। मगर सहारनपुर शहर में एक नहीं अनेक जगह पर पशु खासकर गाय सड़कों पर दिन भर भटकती हैं, जिनकी वजह से यातायात प्रभावित होता है। कोर्ट रोड पर रीडर्स पैराडाइज के पास सुबह के समय कई दर्जन गाय सड़क के बीचोंबीच खड़ी हो जाती हैं। शहर के अन्य मार्गों पर भी ऐसी स्थिति बनती है। नगर निगम कई बार नोटिस जारी कर पशु पालकों को अपने पशुओं को घर में रखने की चेतावनी दे चुका है। कई बार पशुओं को जब्त करने की भी चेतावनी जारी की गई है। मगर चूंकि नगर निगम के पास कांजी हाउस ही नहीं है। ऐसे में उसकी चेतावनी का कोई असर लोगों पर नजर नहीं आ रहा है।
कुत्तों के लिए चलाया था नसबंदी अभियान
नगर निगम ने कुछ समय पहले शहर में कुत्तों की नसबंदी का अभियान चलाया। इसके तहत नगर निगम की टीम कुत्तों को मोहल्लों से उठाकर उन्हें एक सेंटर पर ले जाती थी, जहां नसबंदी कर कुत्तों को वापस उनके मोहल्लों में छोड़ा जाता था। यह अभियान कुछ दिन चलने के बाद बंद हो गया। शहर के अनेक इलाकों को छोड़ दिया गया। लाखों रुपया खर्च करने के बावजूद कोई असर अभियान का नजर नहीं आया है।
यदि शहर को साफ सुथरा बनना है तो डेयरियों को शहर से बाहर किया जाना बेहद जरूरी है और यह काम हमारी प्राथमिकता में है। केवल डेयरियां ही नहीं अन्य सभी प्रकार के पशुओं का पालन भी शहर से बाहर ही हो सकेगा।
-गौरव वर्मा, नगरायुक्त।